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योगेश्वर की हार के बाद भी जिंदा थी पदक की उम्मीद

Mon, 22 Aug 2016 10:49 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 22 Aug 2016 10:49 PM IST
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Yogeshwar Dutt lost in first round
योगेश्वर दत्त - फोटो : PTI
ओलंपिक खेलों का आज आखिरी दिन था। पूरे देश की नजरें  लंदन ओलंपिक के कांस्य पदक विजेेता योगेश्वर दत्त पर टिकी थीं, योगेश्नर की मां के साथ-साथ सवा अरब लोगों को यकीन था  कि वह स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरान्वित करेंगे। 
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शाम पांच बजे उनका मुकाबला मंगोलिया के पहलवान मंदाखरदान गैंजोरिक से शुरु हुआ। हर कोई टकटकी लगाए अपने-अपने टीवी सेट के आगे इस आशा में बैठा था कि आज वे इतिहास  बनता देखेंगे। आज योगेश्वर देश को स्वर्ण पदक दिलाने वाले भारतीय पहलवान बनेंगे। लेकिन कुछ ही पलों में लोगों की आशाएं काफूर हो गया। योगेश्वर का कोई दांव मंगोलिया के पहलवान के सामने नहीं चला और पहले ही दौर में  उन्हें 3-0 के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।  
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Yogeshwar Dutt lost in first round
योगेश्वर दत्त - फोटो : getty
योगेश्वर की हार के बाद  लोगों की नजरें मंगोलिया के पहलवान के प्रदर्शन पर टिक गईं, हर कोई प्रार्थना करने लगा कि मंगोलियाई पहलवान फाइनल तक पहुंचे और योगेश्वर को पदक जीतने का एक और मौका मिले। 

 अगले मैच में मंगोलिया के पहलवान ने चीन के पहलवान को भी 3-0 से मात दी तो कुछ पल  के लिए ऐसा लगा कि दर्द देने वाला पहलवान ही फाइनल में पहुंच कर योगेश्वर को दवा देगा। लेकिन यह सिलसिला भी बहुत आगे तक नहीं चल सका।

शाम पौने सात बदजे जैसे ही क्वार्टर फाइनल में  मंदाखरदान गैंजोरिक के रुसी पहलवान से 3-0 से हारते ही ओलंपिक में भारत की अंतिम चुनौती भी समाप्त हो गई। 

साल 2014 में योगेश्नर ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया था। वह अच्छे फॉर्म में चल रहे थे लेकिन वह ओलंपिक में अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सके। 

Yogeshwar Dutt lost in first round
योगेश्वर दत्त - फोटो : pti
रियो ओलंपिक में जाने से पहले योगेश्वर दत्त ने कहा था कि रियो ओलंपिक उनका आखिरी ओलंपिक होगा और वो पूरी कोशिश करेंगे कि इस बार वो देश के लिए गोल्ड मेडल जीतें। योगेश्वर ने यह बात साफ कर दिया है कि वे रियो ओलंपिक के बाद संन्यास का ऐलान करेंगे। 

अब रियो से खाली हाथ लौटने के बाद योगेश्नर क्या फैसला करते हैं यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन भारतीय पुरुष पहलवानों के  लिए रियो ओलंपिक बेहद खराब गुजरा। कुश्ती की नाक साक्षी मलिक ने कटने से बचा ली, लेकिन पुरुषों का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। 

रियो जाने से पहले सुशील और नरसिंह विवाद कोर्ट पहुंचा। सुशील के रियो नहीं जाने के बाद नरसिंह डोपिंग विवाद सामने आ गया। किसी तरह नरसिंह रियो पहुंचे भी तो वाडा ने उनपर चार साल का प्रतिबंध लगा दिया। 

 इसके बाद पूरी आशाएं योगेश्नवर पर  टिक गई थीं, लेकिन उन्होंने भी निराश किया। 

इस पूरे घटना क्रम में कुश्ती में गुटबाजी उभर कर सामने आई। इसका फायदा व्यक्तिगत तौर पर किसी को हुआ हो नहीं, लेकिन देश को ऐसा नुक्सान हुआ है जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकेगी। 
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