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UEFA Europa League: 42 साल बाद इंत्राक्त फ्रेंकफर्ट ने जीता कोई यूरोपीय खिताब, एक लाख से अधिक रेंजर्स समर्थकों का टूटा दिल
Fri, 20 May 2022 03:46 PM IST
रोहित राज
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, सेविला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, सेविला
Published by: रोहित राज
Updated Fri, 20 May 2022 03:46 PM IST
सार
फाइनल से पहले ही दोनों टीमों के समर्थकों के बीच हंगामा शुरु हो गया। नतीजन सेविला प्रशासन को इन्हें काबू करने के लिए 500 अतिरिक्त पुलिस कर्मियों की तैनाती करनी पड़ी। रेंजर्स समर्थकों को शहर के उत्तरी हिस्से स्थित स्टेडियम में बिठाकर मैच दिखाया गया।
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ट्रॉफी के साथ इंत्राक्त फ्रेंकफर्ट की टीम
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
यूईएफए यूरोपा कप के फाइनल में जर्मनी के क्लब इंत्राक्त फ्रेंकफर्ट ने स्कॉटलैंड के क्लब रेंजर्स को हरा दिया। इस बार का यूरोपा लीग का फाइनल कई कारणों से खास था। सेविला के एस्टाडियो डि रामोन सांचेज पिजुआन की क्षमता 42 हजार सात सौ दर्शकों की है, लेकिन लीग के फाइनल को देखने के लिए शहर में एक लाख समर्थक स्कॉटलैंड के क्लब रेजर्स के और 50 हजार समर्थक जर्मनी के क्लब इंत्राक्त फ्रेंकफर्ट के पहुंच गए थे।
फाइनल से पहले ही दोनों टीमों के समर्थकों के बीच हंगामा शुरु हो गया। नतीजन सेविला प्रशासन को इन्हें काबू करने के लिए 500 अतिरिक्त पुलिस कर्मियों की तैनाती करनी पड़ी। बवाल न हो इसके लिए बिना टिकट के रेंजर्स समर्थकों को शहर के उत्तरी हिस्से स्थित स्टेडियम में बिठाकर बड़ी स्क्रीन पर मैच दिखाया गया, लेकिन उनका समर्थन रेंजर्स के काम नहीं आया। 57 मिनट में अरीबो केगोल से बढ़त बनाने के बावजूद उसे पेनाल्टी शूट आउट में 5-4 से हार का सामना करना पड़ा। 42 साल बाद इंत्राक्त फ्रेंकफर्ट ने कोई यूरोपीय खिताब जीता है। इससे पहले 1980 में यूईएफा कप जीता था।
लगभग पांच करोड़ की मिली इनामी राशि
इस जीत के साथ इंत्राक्त फ्रेंकफर्ट ने न सिर्फ चैंपियंस लीग के लिए पहली बार क्वालिफाई कर लिया बल्कि 60 मिलियन यूरो (लगभग चार अरब, 90 करोड़ रुपये) की भारी भरकम इनामी राशि पर भी कब्जा जमा लिया। पहला हाफ गोल रहित गया, लेकिन दूसरे हॉफ के 12 मिनट बाद ही जे अरीबो ने जैसे ही गोल किया, स्टेडियम और स्टेडियम के बाहर रेंजर्स के समर्थकों ने आसमान सिर पर उठा लिया। इस गोल पर उनकी खुशी देखते ही बनती थी, लेकिन 12 मिनट बाद ही फ्रेंकफर्ट के कोलंबियन स्ट्राइकर रॉफेल बोरे ने गोल कर मुकाबला 1-1 की बराबरी पर ला दिया। निर्धारित और अतिरिक्त समय में भी दोनों टीमें इसके बाद गोल नहीं कर पाईं। जिसके चलते फैसला पेनाल्टी शूट आउट के जरिए करना पड़ा।
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गोलकीपर ट्रैप ने खिताब दिलाने में निभाई भूमिका
यह फ्रेंकफर्ट के गोलकीपर केविन ट्रैप थे जिन्होंने अपनी टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अतिरिक्त समय समाप्त होने से ठीक पहले रयान केंट की किक को पीएसजी के पूर्व गोलकीपर ट्रैप ने बखूबी बचाया। इसके बाद उन्होंने शूट आउट में अरोन रामसे की किक का बचाव कर फ्रेंकफर्ट को विजेता बना दिया दिया।
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फाइनल से पहले ही दोनों टीमों के समर्थकों के बीच हंगामा शुरु हो गया। नतीजन सेविला प्रशासन को इन्हें काबू करने के लिए 500 अतिरिक्त पुलिस कर्मियों की तैनाती करनी पड़ी। बवाल न हो इसके लिए बिना टिकट के रेंजर्स समर्थकों को शहर के उत्तरी हिस्से स्थित स्टेडियम में बिठाकर बड़ी स्क्रीन पर मैच दिखाया गया, लेकिन उनका समर्थन रेंजर्स के काम नहीं आया। 57 मिनट में अरीबो केगोल से बढ़त बनाने के बावजूद उसे पेनाल्टी शूट आउट में 5-4 से हार का सामना करना पड़ा। 42 साल बाद इंत्राक्त फ्रेंकफर्ट ने कोई यूरोपीय खिताब जीता है। इससे पहले 1980 में यूईएफा कप जीता था।
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लगभग पांच करोड़ की मिली इनामी राशि
इस जीत के साथ इंत्राक्त फ्रेंकफर्ट ने न सिर्फ चैंपियंस लीग के लिए पहली बार क्वालिफाई कर लिया बल्कि 60 मिलियन यूरो (लगभग चार अरब, 90 करोड़ रुपये) की भारी भरकम इनामी राशि पर भी कब्जा जमा लिया। पहला हाफ गोल रहित गया, लेकिन दूसरे हॉफ के 12 मिनट बाद ही जे अरीबो ने जैसे ही गोल किया, स्टेडियम और स्टेडियम के बाहर रेंजर्स के समर्थकों ने आसमान सिर पर उठा लिया। इस गोल पर उनकी खुशी देखते ही बनती थी, लेकिन 12 मिनट बाद ही फ्रेंकफर्ट के कोलंबियन स्ट्राइकर रॉफेल बोरे ने गोल कर मुकाबला 1-1 की बराबरी पर ला दिया। निर्धारित और अतिरिक्त समय में भी दोनों टीमें इसके बाद गोल नहीं कर पाईं। जिसके चलते फैसला पेनाल्टी शूट आउट के जरिए करना पड़ा।
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गोलकीपर ट्रैप ने खिताब दिलाने में निभाई भूमिका
यह फ्रेंकफर्ट के गोलकीपर केविन ट्रैप थे जिन्होंने अपनी टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अतिरिक्त समय समाप्त होने से ठीक पहले रयान केंट की किक को पीएसजी के पूर्व गोलकीपर ट्रैप ने बखूबी बचाया। इसके बाद उन्होंने शूट आउट में अरोन रामसे की किक का बचाव कर फ्रेंकफर्ट को विजेता बना दिया दिया।