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स्टेडियमों में पानी, बिजली की बर्बादी रोकेगा मंत्रालय
हेमंत रस्तोगी/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 20 Jun 2016 04:43 AM IST
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खेल मंत्रालय ने स्टेडियमों में कम पानी के उपयोग और बिजली की बर्बादी पर गाइडलाइंस तैयार करने को कहा
स्टेडियमों में पानी की बर्बादी के चलते सूखाग्रस्त महाराष्ट्र में अदालत के आदेश पर आईपीएल मुकाबले रद्द किए जाने की घटना से खेल मंत्रालय ने भी सबक ले लिया है। मंत्रालय ने उसके अधीन आने वाले देश भर के स्टेडियमों में पानी और बिजली की बर्बादी रोकने को कमर कस ली है। मंत्रालय ने इस संबंध में साई को विस्तृत गाइडलाइंस तैयार करने को कहा है। सबसे ज्यादा पानी की बर्बादी टर्फ पर होने वाले हॉकी मुकाबलों में होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कहा गया है कि टर्फ को बिछाने के दौरान कुछ इस तरह का डिजाइन तैयार किया जाए जिससे पानी की बर्बादी को रोका जा सके।
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खास बात यह है कि अब तक पानी का ही मामला सामने आया है। फ्लड लाइट के जरिए खर्च होने वाली बिजली पर अब तक किसी ने अंगुली नहीं उठाई है, लेकिन मंत्रालय ने इस पर भी दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा है।
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साई को इस मुद्दे पर गाइडलाइंस तैयार करने को कहने की वजह यह है कि उसके संरक्षण में ही देश और दिल्ली (नेहरू, ध्यानचंद, इंदिरा गांधी स्टेडियम) के ज्यादातर नामी स्टेडियम आते हैं। मंत्रालय ने अपने आदेश में भी साफ किया है कि आईपीएल के दौरान अदालत के आए आदेश के चलते स्टेडियमों में पानी की बर्बादी पर उसे गंभीर होना पड़ रहा है। साई गाइडलाइंस तैयार करने के लिए विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों की राय ले सकता है।
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साई के इस वक्त देश में सबसे ज्यादा हॉकी के स्टेडियम हैं। इनमें टर्फ भी बिछी है। हॉकी मैच गीली टर्फ पर होता है। ज्यादातर स्थानों पर इस पानी के उपयोग की व्यवस्था नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने कहा है कि टर्फ बिछाने का ऐसे दिशा निर्देश और डिजाइन तैयार कराए जाएं, जिससे पानी का कम प्रयोग हो साथ ही बर्बाद होने वाले पानी को संरक्षित किया जा सके।
दरअसल क्रिकेट स्टेडियमों में पानी की बर्बादी का मामला बीते दिनों काफी गर्माया रहा। खास तौर पर फिरोजशाह कोटला में डीडीसीए की ओर से आरओ वॉटर से सिचाई किए जाने के मुद्दे को एनजीटी ने भी गंभीरता से लेते हुए उससे जवाब-तलबी की है। निकट भविष्य में इसी तरह के विवादों से बचने के लिए ही मंत्रालय ने स्टेडियमों में पानी और बिजली की बर्बादी रोकने के लिए गाइडलाइंस तैयार करने का मन बनाया है।
Published By Rahul Sankrityayan