फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Sports ›   Other Sports ›   Rio Paralympics: Double Delight for India in high jump, Thangavelu clinches gold and Varun bronze

रियो पैरालंपिकः थांगावेलू को स्वर्ण, भाटी को कांस्य

Sat, 10 Sep 2016 09:55 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 10 Sep 2016 09:55 PM IST
विज्ञापन
Rio Paralympics: Double Delight for India in high jump, Thangavelu clinches gold and Varun bronze
थांगावेलु - फोटो : getty
भारत के दो पैरा एथलीटों ने शुक्रवार को रियो पैरालंपिक खेलों में ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो आज तक भारत के खेल इतिहास में नहीं हुआ। ओलंपिक जैसे दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजन की ऊंची कूद स्पर्धा में मरियप्पन थांगावेलू और वरुण सिंह भाटी ने क्रमशः स्वर्ण और कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। मरियप्पन थांगावेलू ने 1.89 मीटर ऊंची छलांग लगाई, वहीं वरुण ने 1.86 मीटर की छलांग लगा सके, लेकिन इनकी छलांग ने दोनों को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। अपनी स्वर्णिम सफलता के साथ मरियप्पन थंगावेलू पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले तीसरे भारतीय बन गए हैं। उनसे पहले 1972 में मुरलीकांत पेटकर ने हेजबर्ग में तैराकी और 2004 में देवेंद्र झाझरिया ने भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया था।
विज्ञापन


मरियप्पन के स्वर्ण पदक की बदौलत भारत पदक तालिका में 26वें स्थान पर पहुंच गया है। रियो पैरालंपिक खेलों में भारत की ओर से 20 सदस्यीय दल ने भाग लिया है। इन दोनों पदकों के साथ पैरालंपिक खेलों में भारत के पदकों की कुल संख्या अब बढ़कर 10 हो गई है जिसमें 3 स्वर्ण, 3 रजत और 4 कांस्य पदक शामिल हैं।
विज्ञापन


 

बचपन में पैर पर चढ़ गई थी बस

Rio Paralympics: Double Delight for India in high jump, Thangavelu clinches gold and Varun bronze
थांगावेलु - फोटो : getty
भारत को रियो पैरालंपिक खेलों में पहला पदक दिलवाने वाले 21 वर्षीय मरियप्पन थांगावेलू का जीवन बेहद संघर्ष में गुजरा है। मरियप्पन का जन्म तमिलनाडु के सालेम के निकट पेरियावादगमाती गांव में हुआ था। उनकी मां सब्जियां बेचने का काम करती हैं। कुछ साल पहले मरियप्पन ने अपने इलाज के लिए 3 लाख रुपये का लोन लिया था जिसे वो आजतक नहीं चुका पाए हैं।

मरियप्पन जब महज पांच साल के थे तब एक बस दुर्घटना में उनका पैर चोटिल हो गया था। स्कूल जाते वक्त एक बस उनके पैर में चढ़ गई इसमें उनका घुटना बुरी तरह घायल हो गया और वह हमेशा के लिए विकलांग हो गए। उनकी रुचि बचपन से ही खेलों में थी, शारीरिक अक्षमता के बावजूद उन्होंने स्कूल की तरफ से वॉलीबॉल खेला। मरियप्पन के स्पोर्ट्स टीचर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें ऊंची कूद के लिए प्रेरित किया। मजह 15 साल की उम्र में मरियप्पन ने अपनी पहली प्रतियोगिता में भाग लिया और उसमें रजत पदक जीतकर सबको चकित कर दिया। वह साल 2015 में ऊंची कूद में विश्व नंबर एक बने थे।

मरियप्पन के लिए पदक जीतना कोई नई बात नहीं है, इन्होंने ट्यूनीशिया ग्रां प्री में 1.78 मीटर की जंप लगाकर स्वर्ण पदक हासिल किया और ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया था। 1.60 मीटर क्वालिफिकेशन मार्क था। वह इससे कहीं आगे थे।
 

पोलियो भी नहीं रोक सका रास्ता

Rio Paralympics: Double Delight for India in high jump, Thangavelu clinches gold and Varun bronze
वरुण सिंह भाटी - फोटो : getty
कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचने वाले वरुण सिंह भाटी उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के जमालपुर गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता किसान हैं। गांव में रहकर ही तैयारी करने वाले वरुण को पूरी सुविधाएं तो नहीं मिलीं लेकिन उन्होंने कभी इसकी शिकायत नहीं की और देश का नाम रोशन किया। वरुण सिंह ऊंची कूद में वर्ल्ड रैंकिंग दो पर थे। हालांकि वह स्वर्ण पदक के दावेदार थे। लेकिन हम वतन तमिलनाडु के मरयप्पन थांगवेलू से पिछड़ गए। वरुण एक पैर से दिव्यांग हैं उन्हें बचपन में पोलियो हो गया था। लेकिन उनके हौंसलों की कोई सीमा नहीं है। अब से पहले तमाम राष्ट्रीय एवं अंततराष्ट्रीय स्पर्धाओं में उनके नाम पदक हैं। वरुण के पिता हेम सिंह भाटी इस कामयाबी से गदगद हैं। बोले, मुझे अपने बेटे पर पूरा भरोसा था। लेकिन वह स्वर्ण का दावेदार था। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed