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जंगल में लकड़ियां उठाती थी मीराबाई चानू, अब मेहनत के दम पर मिलेगा खेल रत्न!

Sat, 22 Sep 2018 04:47 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 22 Sep 2018 04:47 PM IST
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Khel ratna award: Success story of Meera Bai Chanu
8 अगस्त 1994 को जन्मीं मणिपुर की रहने वाली मीराबाई चानू का बचपन बेहद गरीबी में गुजरा। इम्फाल से 20 किमी दूर नोंगपोक काचिंग गांव में गरीब परिवार में जन्मीं चानू छह भाई बहनों में सबसे छोटी हैं।
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टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली के साथ राजीव गांधी खेल रत्न के लिए नामित हुई इस वेटलिफ्टर के बारे में कुछ ऐसी बातें हैं, जो आप शायद ही जानते होंगे। चानू ने बचपन में बेहद दर्द झेला, चोट खाई लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
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2017 वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने के बाद कॉमनवेल्थ खेल 2018 में देश को पहला मेडल दिलाने वाली चानू का वेटलिफ्टिंग से जुड़ाव भी किस्सी मजेदार किस्से से कम नहीं। वे अपने बड़े भाई के साथ जंगल में लकड़ियां बीनने जाती थीं।
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एक बार जंगल में उनका बड़ा भाई लकड़ियों का भारी गठ्ठर नहीं उठा पाया लेकिन उनसे चार साल छोटी चानू जो कि उस वक्त सिर्फ 12 साल की थीं उन्होंने उस गठ्ठर को आसानी से उठा लिया। इसके बाद वो वेटलिफ्टिंग के खेल में ही आगे बढ़ीं।

बचपन में चानू के गांव में वेटलिफ्टिंग सेंटर नहीं था और इसलिए उन्हें रोज ट्रेन से 60 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। चानू ने 2007 में खेलों में अपना सफर शुरू किया। शुरुआत उन्होंने इंफाल के खुमन लंपक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से की थी।

11 साल की उम्र में अंडर-15 चैंपियन बनीं और 17 साल की उम्र में जूनियर चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। लोहे का बार खरीदना परिवार के लिए भारी था तो उन्होंने बांस से ही बार बनाकर अपनी मेहनत जारी रखी।

चानू ने वैसे तो कई मौकों पर देश का नाम रोशन किया है लेकिन पिछले साल उन्होंने गोल्ड हासिल कर सुर्खियां बटोरी थी। इसके बाद इस साल अप्रैल में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया था। हालांकि चोट के चलते वो एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाई थीं।


बेहद कम ही लोग जानते हैं कि चानू जब भी विदेश में टूर्नामेंट खेलने जाती हैं तो वे देशी चावल ले जाती हैं। वो विदेश में जहां भी होती हैं वो भारत के ही चावल उबालकर खाती हैं।
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