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14 सितंबर विशेष: हिंदी कमेंट्री से लोकप्रियता का शिखर छूने की कोशिश  

Sun, 10 Sep 2017 07:36 PM IST
amarujala.com-presented by: शरद मिश्र
amarujala.com-presented by: शरद मिश्र Updated Sun, 10 Sep 2017 07:36 PM IST
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hindi diwas: hindi commentary help much to elonglated sports in the country
हिंदी कमेंट्री - फोटो : you tube
देश में खेलों को लोकप्रिय करने में भाषा की बहुत बड़ी भूमिका है। भारत में 70 फीसदी जनसंख्या हिंदी बोलती और पढ़ती है। लिहाजा देश में अगर किसी खेल की टीआरपी बढ़ानी है तो चैनलों को हिंदी का सहारा लेना ही पड़ेगा। हिंदी बाहुल्य जनसंख्या को देखते हुए देश में टीआरपी के लिए कई चैनल आज हिंदी में विशेष कमेंट्री कर रहे हैं। विदेश के चैनल देश में शीर्ष बने रहने के लिए हिंदी को आगे कर रहे हैं। यही हमारी हिंदी के महत्व को जगजाहिर कर रहा है। स्टार नेटवर्क ने हिंदी में कमेंट्री को बढ़ावा दिया है। कुछ साल पहले लोकप्रिय स्पोर्ट्स चैनल ईएसपीएन में हिंदी की कमेंट्री क्रिकेट की लोकप्रियता में इजाफा कर चुकी है। क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों को भी हिंदी के जरिए लोकप्रिय किया जा रहा है। स्टार स्पोर्ट्स में प्रो कबड्डी लीग की कमेंट्री हिंदी में हो रही है। कबड्डी खेल को समझने में हिंदी सहायक हो रही है। इससे कबड्डी की लोकप्रियता काफी बढ़ रही है। स्टार नेटवर्क ने देश का पहला फ्री टू एयर प्राइवेट स्पोर्ट्स चैनल लांच किया है। जिसमें हिंदी कमेंट्री को तरजीह दी गई है। 
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प्रो कबड्डी लीग के अलावा बीसीसीआई के घरेलू क्रिकेट और घरेलू फुटबॉल लीग के मैच भी हिंदी कमेंट्री के साथ प्रसारति होंगे। स्टार नेटवर्क के अलावा सोनी टीवी, टेन स्पोर्ट्स में भी हिंदी की कमेंट्री की जा रही है। बीसीसीआई के प्रसिद्ध कमेंटेटर जब आपको स्टार स्पोर्ट्स में हिंदी में मैच की लाइव कमेंट्री करते हैं तो यह काफी रोचक होता है। हमेशा अंग्रेजी में वार्तालाप करने वाले महान सुनील गावस्कर जब क्रिकेट की बारीकी को हिंदी में बयां करते हैं तो यह अपने आप में रोमांचक होता है। 
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गुजरे जमाने के विस्फोटक ओपनर वीरेंद्र सहवाग कहते हैं कि जो जजबात हिंदी में है वह किसी भाषा में नहीं, सहवाग का यह कहना पूरी तरह सही है। जब खिलाड़ी के कमाल को हिंदी भाषा में पूरे भाव और जजबात के साथ व्यक्त किया जाता है तो वह खेल और खिलाड़ी के रोमांच को निश्वित रूप से दुगुना कर देता है। क्रिकेट को केवल गावस्कर, कपिल और सचिन ने ही आकर्षक नहीं बनाया बल्कि वह हिंदी के कमेंटेटरों से भी आकर्षक और लोकप्रिय खेल बना है। 
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देश में हिंदी की कमेंट्री को संजय बनर्जी और सुशील दोषी, रवि चतुर्वेदी ने एक हद तक नया आयाम दिया है। दोषी की कमेंट्री से लाखों करोड़ों लोग दशकों तक अभिभूत रहे। उनकी क्रिकेट कमेंट्री दर्शकों को रोमांचित करती थी। मनीष देव, मुरली मनोहर मंजुल, सुरैश सरैया, अनंत सितलवाड़ ने भी हिंदी में क्रिकेट का आंखों देखा हाल सुनाया। पर दोषी की कमेंट्री लाजवाब रही है। 

सुशील दोषी जैसे कमेंटटर ने कमेंट्री के लिए नए शब्द दिए, मुहावरे तलाशे। 

रेडियो पर तो अच्छे कमेंट्रेटर रहे लेकिन टीवी पर कमेंट्री के लिए अब रिटायर्ड क्रिकटेर आगे आ गए हैं। अगर टीवी पर क्रिकेट को सुने देखें तो सुनील गावस्कर, वसीम अकरम बहुत अच्छी कमेंट्री करते रहे हैं। एक दम सधी हुई और संतुलित। कपिल देव, मोहम्मद कैफ, आकाश चोपड़ा, वीरेंद्र सहवाग, नवजोत सिद्धू भी बेहतर कमेंट्री कर लेते हैं। सुनील गावस्कर अंग्रेजी-हिंदी दोनों में बढ़िया कमेंट्री करते हैं। कई क्रिकेटरों के खेल से अलग होने के बाद कमेंट्रेटर बन जाने से टीवी में सुशील दोषी, मुरली मनोहर मंजुल, रवि चतुर्वेदी जैसे हिंदी कमेंट्रेटरों को जगह नहीं मिल पाई। 
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