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महामारी का असर: जापान में अब नदारद 1964 के ओलंपिक जैसा उत्साह

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 11 Jun 2021 07:46 AM IST

सार

पिछले साल होने वाले खेलों को इस साल के लिए स्थगित किया गया और अब यह 23 जुलाई से प्रारंभ होने हैं
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सांकेतिक तस्वीर...
सांकेतिक तस्वीर... - फोटो : social Media

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विस्तार

जापान 57 साल पहले ओलंपिक की मेजबानी की थी और तब वह ऐसा करने वाला एशिया का पहला देश बना था। खेलों के महाकुंभ के आयोजन से उसकी अर्थव्यवस्था में बड़ी मजबूती आई थी। अब हालात जुदा हैं, कोविड-19 की महामारी के बीच मेजबानी के उत्साह पर असर डाला है।
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जापान में अब दिशा और दशा बदल गई है। जब 1964 में उसने आयोजन किया था तब यह देश के लिए गौरव की बात थी जब द्वितीय विश्व कप युद्ध की हार के बीस साल बाद ये खेल उल्लास के घोतक बन गए थे। उस समय जापानी परिवार बड़े थे। उस समय वार्षिक औसत वेतन अब के मुकाबले दस गुना कम था। खाने-पीने की चीजें भी कम महंगी थी। 


तब हर हाथ को था काम 
1964 में जापान में बेरोजगारी लगभग न के बराबर थी। कामकाजी लोगों में ज्यादातर पुरुष थे, शादी के बाद महिलाएं घरेलू कामकाज में व्यस्त हो जाती थी। तीस प्रतिशत से ज्यादा लोग निर्माण से जुड़े थे। इलेक्ट्रॉनिक और कार निर्माण में जापान का सिक्का जमा रहे थे।

हालांकि एक चौथाई लोग कृषि, मस्तस्य पालन आदि से जुड़े थे। अब ज्यादातर लोग नौकरीपेशा हैं और 25 प्रतिशत ही निर्माण में लगे हैं। केवल 4 प्रतिशत ही खेती और उससे जुड़ा कामकाज कर रहे हैं।

महंगे टीवी सेट खरीदे 
पहली बार प्रसारित हो रहे खेलों को देखने का इतना चाव था कि बहुत लोगों ने ब्लैक एंड व्हाइट टीवी सेट खरीद लिए थे जबकि उनकी कीमत एक महीने की तनख्वाह के बराबर थी। ओलंपिक की उमंग में लोगों ने कार, कूलर और रंगीन टीवी के लिए अन्य इच्छाओं की तिलांजलि दे दी थी।

तब पुरुषों की औसत आयु 67 और महिलाओं की 72 थी और चार में एक व्यक्ति 15 या उससे कम उम्र का था। केवल मुट्ठी भर ही 65 से अधिक थे। अब पुरुषों की औसत आयु 81 जबकि महिलाओं की 87 है। राष्ट्र अपनी आबादी का लगभग एक तिहाई 65 से अधिक होने के बोझ से दब गया है।  

 चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था थी 
उस समय जापान की अर्थव्यवस्था सकल घरेलू उत्पाद के लिहाज से अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के बाद चौथे नंबर पर थी। ओलंपिक के चार साल बाद जापान दूसरे नंबर पर आ गया था और सत्तर के दशक के कुछ शुरुआती वर्षों को छोड़ दें तो इस पोजिशन को उसने लंबे तक कायम रखा था। उसके बाद चीन का दबदबा कायम हो गया। तब जापान की मुद्रा येन की कीमत 360 थी जो अब 109.5 रह गई है। 

घट रहे विदेशी पर्यटक 
1964 के ओलंपिक वर्ष में जापान में 2,70,000 विदेशी आए थे। यहां तक कि 2019 में  विदेशी पर्यटकों की संख्या 31.9 मिलियन थी जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली थी लेकिन 2020 में कोविड-19 के दौर में पर्यटकों की संख्या 22 वर्ष में सबसे कम हो गई। इस बार तो ओलंपिक में विदेशी पर्यटकों पर रोक ही लगा दी गई है।

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