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Climbing : भारतीय पर्वतारोहियों ने पीर पंजाल रेंज में गुप्त पर्वत को फतह किया, अब तक कोई नहीं हो सका था सफल

Tue, 25 Jun 2024 05:06 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Tue, 25 Jun 2024 05:06 PM IST
सार

कोलकाता दक्षिण के बाहरी इलाके सोनारपुर में स्थित पर्वतारोहियों के क्लब सोनारपुर आरोही द्वारा संचालित तथा पर्वतारोही रूद्र प्रसाद हलदर के नेतृत्व में टीम लगभग आठ घंटे की चढ़ाई के बाद सुबह करीब 8.45 बजे गुप्त पर्वत की चोटी पर पहुंची।

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Climbing : Indian climbers conquer virgin Gupt Parvat in Pir Panjal range of Himachal Pradesh’s Lahul district
पीर पंजाल रेंज - फोटो : Social Media

विस्तार

भारतीय पर्वतारोहियों ने वो काम कर दिखाया जो अब तक इससे पहले कोई भी नहीं कर सका है। पश्चिम बंगाल के नौ पर्वतारोहियों की एक टीम ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले के पीर पंजाल रेंज में 5,988 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक चोटी गुप्त पर्वत को फतह किया। पर्वतारोहण टीम के क्लब ने यह जानकारी दी।
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कोलकाता दक्षिण के बाहरी इलाके सोनारपुर में स्थित पर्वतारोहियों के क्लब सोनारपुर आरोही द्वारा संचालित तथा पर्वतारोही रूद्र प्रसाद हलदर के नेतृत्व में टीम लगभग आठ घंटे की चढ़ाई के बाद सुबह करीब 8.45 बजे गुप्त पर्वत की चोटी पर पहुंची। इस टीम में विश्व के सबसे युवा पर्वतारोही और प्रत्येक महाद्वीप की सात चोटियों तथा सात ज्वालामुखी चोटियों पर चढ़ने वाले भारत के पहले शख्स सत्यरूप सिद्धांत शामिल थे तथा इसमें एक महिला सदस्य दीपोश्री पॉल भी शामिल थीं। यह टीम तीन जून को कोलकाता से माउंट शिकार बेह (6,200 मीटर) और गुप्त पर्वत की चोटी पर चढ़ने के दोहरे लक्ष्य के साथ रवाना हुई थी, लेकिन पता चला कि जब पर्वतारोही चोटी पर जाने के लिए रास्ता बनाने में सफल हो गए, तभी हिमस्खलन के कारण महत्वपूर्ण चढ़ाई उपकरण नष्ट हो गए, जिसके कारण उन्हें शिखर पर चढ़ने की उम्मीद छोड़नी पड़ी। इसके बाद टीम ने गुप्त पर्वत को फतह करने पर ध्यान केंद्रित किया।
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पर्वतारोहियों ने बताया कि इस पर्वत का नाम इसकी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण पड़ा है। यह चोटी हिमालय पर्वतमाला की अन्य चोटियों के बीच अदृश्य है, जिसके कारण इसकी तस्वीर लेना भी लगभग असंभव है। पर्वतारोहण सहायता दल के सदस्य दीपांजन दास ने बताया, टीम ने 5,285 मीटर की ऊंचाई पर शिविर स्थापित किया और पर्वत के पश्चिमी हिस्से के माध्यम से चोटी तक पहुंचने की योजना बनाई। पिछले तीन दिन से लगातार बर्फबारी के कारण पर्वतारोही चोटी तक पहुंचने के लिए समय का इंतजार कर रहे थे। आखिरकार उन्होंने 25 जून को तड़के एक बजे शिखर पर चढ़ने की योजना बनाई।
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