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इतिहास के पन्नों से: 1896 ओलंपिक...जब एथेंस में उदय हुआ नए युग का सवेरा

Sat, 17 Jul 2021 10:03 PM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मुकेश कुमार झा Updated Sat, 17 Jul 2021 10:03 PM IST
सार

एथेंस में प्राचीन यूनान की खोई हुई परंपरा ओलंपिक खेलों को दोबारा जीवित किया गया।

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1896 athens olympics: history and Some interesting facts 
1896 एथेंस ओलंपिक - फोटो : social media

विस्तार

टोक्यो ओलंपिक खेलों में अब छह दिन शेष हैं और ऐसे में हम पिछले कुछ ओलंपिक से जुड़े रोचक तथ्यों से आपको रूबरू करा रहे हैं। ऐसे में आइए एक नजर डालते हैं 1896 एथेंस ओलंपिक से जुड़े कुछ रोचक पहलू पर...

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एथेंस ओलंपिक (1896)

 

  • रोमन सम्राट थियोडोसियस द्वारा 1500 साल पहले प्रतिबंधित किए जाने के बाद एथेंस में प्राचीन यूनान की खोई हुई परंपरा ओलंपिक खेलों को दोबारा जीवित किया गया।
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  • अतीत की प्रतियोगिताओं की तरह 1896 एथेंस खेलों में भी सिर्फ पुरुष प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। यह आधुनिक ओलंपिक में एकमात्र खेल थे, जिसका हिस्सा महिला प्रतिभागी नहीं थी।
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  • छह से 15 अप्रैल तक हुए इन खेलों में 14 देशों के 241 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
  • खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स (ट्रैक एवं फील्ड), साइकिलिंग, तैराकी, जिम्नास्टिक, भारोत्तोलन, कुश्ती, तलवारबाजी, निशानेबाज और टेनिस की 43 स्पर्धाओं में हिस्सा लिया।
  • पहली बार विजेताओं को पदक सौंपे गए। हालांकि इनमें से कोई स्वर्ण पदक नहीं था। पहले स्थान पर आने वाले खिलाड़ियों को रजत पदक, जैतून की शाखा और डिप्लोमा दिया गया। दूसरे स्थान पर आने वाले खिलाड़ियों को कांसे/तांबे का पदक, कल्पवृक्ष की शाखा और डिप्लोमा दिया गया।

...जब ओलंपिक में उतरा था 10 साल का खिलाड़ी

  • तैराकी स्पर्धाएं जिया खाड़ी में हुईं। प्रतिभागियों को लकड़ी के लट्ठों से बनी नांव से ले जाया गया और फिर वे वहां से तट की ओर गए। इस दौरान रास्ता बताने के लिए बीच में से खाली किए गए सीताफल रस्सी से बांधे गए थे जो पानी में तैर रहे थे।
  • पेनाथेनिक स्टेडियम में हुए कुश्ती प्रतियोगिता के लिए कोई वजन वर्ग तय नहीं था। इसका मतलब यह था सभी प्रतिभागियों के बीच सिर्फ एक विजेता था। आधुनिक ग्रीको रोमन कुश्ती के नियम इसमें लागू थे लेकिन समय की कोई सीमा नहीं थी।
  • यूनान के जिम्नास्ट दिमित्रोस लोंड्रास दस्तावेजों के अनुसार सबसे युवा ओलंपियन बने। उन्होंने 10 साल और 218 दिन की उम्र में टीम समानांतर बार स्पर्धा में हिस्सा लिया और तीसरे स्थान पर रहे।

 

कार्ल शुमान रहे पहले ओलंपिक के सबसे सफल खिलाड़ी

  • अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) पूर्व समय से ही तीसरे स्थान पर रहने वाले सभी खिलाड़ियों के नाम पदक किए।
  • जर्मनी के कार्ल शुमान आधुनिक युग के पहले ओलंपिक के सबसे सफल खिलाड़ी रहे। उन्होंने जिम्नास्टिक और कुश्ती की चार स्पर्धाओं में शीर्ष स्थान हासिल किया। उन्होंने भारोत्तोलन में भी हिस्सा लिया।
  • अमेरिका के ट्रैक एवं फील्ड एथलीट जेम्स कोनोली छह अप्रैल 1896 को त्रिकूद स्पर्धा जीतकर 1500 साल से भी अधिक समय में पहले ओलंपिक चैंपियन बने।
  • खेलों के दौरान पहली बार संगठित मैराथन का आयोजन किया गया लेकिन लगभग आधे प्रतिभागी थकान के कारण स्पर्धा के बीच से हट गए। यूनान के स्पाईरिडन लुई ने यह स्पर्धा जीती।

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