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आईओसी अड़ा, भारत का ओलंपिक से निलंबन कायम
अमर उजाला, ब्यूरो
Updated Fri, 06 Sep 2013 04:27 PM IST
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इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) ने सख्त फैसला लेते हुए भारत का ओलंपिक से प्रतिबंध बरकरार रखा है। साथ ही भारत को आईओसी के शर्त को मानने के लिए 31 अक्टूबर तक का समय दिया है।
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आईओसी ने दागियों पर एकजुट हुई इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) के पिछले साल लगाए गए निलंबन हटाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।
आईओसी ने ब्यूनस आयर्स में अपने 125वें अधिवेशन के दौरान आईओए को अपने संविधान में सुशासन के लिए आचारनीति को हर हाल में लागू करने के लिए कहा है।
फिलहाल आईओए भी इस प्रस्ताव को लागू करने के मूड में नहीं है। उसने साफ कर दिया है कि वह भारतीय कानून के मुताबिक चलेंगे। जरूरत पड़ेगी तो आईओसी से फिर इस संबंध में बात की जाएगी।
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इससे साफ हो गया है कि आईओए पर प्रतिबंध की तलवार अभी लटकी रहेगी। आईओसी ने भारतीय संघ से 31 अक्टूबर से पहले अपने संविधान में संशोधन कर मिलने को कहा है।
आईओए ने अपने संविधान में संशोधन करते हुए दो साल से कम की सजा पाने वाले और दागियों को चुनाव लड़ने की छूट का प्रस्ताव दिया था। उस दौरान बैठक में आए आईओसी सदस्य फ्रांसिस्को एलिजाल्डे से कहा गया था कि भारत में दागियों को दोषी नहीं माना जाता है।
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लेकिन ब्यूनस आयर्स में आईओसी ने आईओए के इस प्रस्ताव को खारिज कर इसे हर हाल में लागू करने को कहा है।
वहीं, खेल मंत्रालय ने आईओसी के कदम का समर्थन करते हुए आईओए की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। खेल मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि आईओए को अपने संविधान में संशोधन करते हुए सुशासन और आचारनीति के प्रस्ताव को शामिल करना चाहिए।
आईओसी के इस कदम के साथ आईओए के 29 सितंबर को प्रस्तावित चुनाव की संभावनाएं खत्म हो गई हैं। आईओसी ने साफ कर रखा है कि बिना संविधान संशोधन के चुनाव नहीं होगा और न ही तब तक प्रतिबंध हटेगा।
प्रतिबंधित आईओए के अध्यक्ष अभय चौटाला ने साफ कर दिया है कि वह भारतीय कानून के मुताबिक चलेंगे। भारतीय कानून के मुताबिक दागियों को दोषी नहीं माना जाता है।
आईओए के कार्यकारी अध्यक्ष विजय मल्होत्रा का कहना है कि आईओसी चार्टर का पालन करना तो होगा। लेकिन यह किसी एक देश पर थोपा नहीं जाना चाहिए।
अगर यह हर देश पर लागू होता है तो निश्चित रूप से भारत को भी इसे मानना होगा। लेकिन यह देखना होगा यह भारत में किन स्थितियों में लागू हो सकता है।