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तेंदुलकर ने पाक के लिए खेला था अपना पहला 'अंतरराष्ट्रीय' मैच
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 08 Nov 2014 03:24 PM IST
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यूं तो यह सभी को मालूम है कि मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 24 साल दिए हैं। इस दौरान उन्होंने कई बेमिसाल पारियां खेलते हुए ढेरों रिकॉर्ड भी बनाए।
उन्होंने महज 16 साल की उम्र में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत 1989 में की और वह भी चिर-प्रतिद्वंद्वी टीम पाकिस्तान के खिलाफ।
लेकिन क्या आप इस पर विश्वास कर पाएंगे कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलने का मौका दो साल पहले ही हासिल कर चुके थे और वह भी भारत के लिए नहीं बल्कि चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के लिए टीम इंडिया के ही खिलाफ। है न आपके लिए आश्चर्यजनक? इसका खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि खुद सचिन तेंदुलकर ने किया है अपनी आत्मकथा में।
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उन्होंने महज 16 साल की उम्र में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत 1989 में की और वह भी चिर-प्रतिद्वंद्वी टीम पाकिस्तान के खिलाफ।
लेकिन क्या आप इस पर विश्वास कर पाएंगे कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलने का मौका दो साल पहले ही हासिल कर चुके थे और वह भी भारत के लिए नहीं बल्कि चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के लिए टीम इंडिया के ही खिलाफ। है न आपके लिए आश्चर्यजनक? इसका खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि खुद सचिन तेंदुलकर ने किया है अपनी आत्मकथा में।
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1987 में भारत के खिलाफ मैदान पर उतरे थे सचिन
सचिन तेंदुलकर को किसी अंतरराष्ट्रीय मैच में मैदान पर उतरने का मौका भारत की ओर से नहीं बल्कि पाकिस्तान की ओर से मिला था।
हुआ यूं कि 1987 में पाकिस्तान की क्रिकेट भारत के दौरे पर थी। उस दौरान मुंबई के बेब्रोर्न स्टेडियम में भारत के खिलाफ एक फेस्टिवल मैच में तेंदुलकर को स्थापन्न क्षेत्ररक्षक के रूप में मैदान पर आने का मौका मिल गया।
इमरान खान की अगुवाई वाली पाक टीम से जावेद मियांदाद और अब्दुल कादिर लंच के कारण मैदान से बाहर चले गए थे और सचिन से क्षेत्ररक्षण करने को कहा गया। इमरान ने उन्हें लॉंग ऑन पर क्षेत्ररक्षण के लिए भेजा, जहां कुछ ही देर में भारत की ओर से कपिल देव ने शॉट खेला। हालांकि 15 मीटर तक दौड़ने के बावजूद वह गेंद को पकड़ नहीं सके।
तेंदुलकर ने अपनी आत्मकथा 'प्लेइंग इट माई वे' में इस घटना का जिक्र किया है। बाद में वह अपने मित्र से चर्चा भी करते हैं कि अगर वह लॉंग ऑन की जगह मिड ऑन पर होते तो वह कैच कर सकते थे।
साथ ही उन्होंने अपनी कितबा में लिखा है, "मैं नहीं जानता कि इमरान खान को यह बात याद है या कोई आइडिया भी है कि मैंने कभी पाकिस्तान टीम के लिए क्षेत्ररक्षण किया था।"
हुआ यूं कि 1987 में पाकिस्तान की क्रिकेट भारत के दौरे पर थी। उस दौरान मुंबई के बेब्रोर्न स्टेडियम में भारत के खिलाफ एक फेस्टिवल मैच में तेंदुलकर को स्थापन्न क्षेत्ररक्षक के रूप में मैदान पर आने का मौका मिल गया।
इमरान खान की अगुवाई वाली पाक टीम से जावेद मियांदाद और अब्दुल कादिर लंच के कारण मैदान से बाहर चले गए थे और सचिन से क्षेत्ररक्षण करने को कहा गया। इमरान ने उन्हें लॉंग ऑन पर क्षेत्ररक्षण के लिए भेजा, जहां कुछ ही देर में भारत की ओर से कपिल देव ने शॉट खेला। हालांकि 15 मीटर तक दौड़ने के बावजूद वह गेंद को पकड़ नहीं सके।
तेंदुलकर ने अपनी आत्मकथा 'प्लेइंग इट माई वे' में इस घटना का जिक्र किया है। बाद में वह अपने मित्र से चर्चा भी करते हैं कि अगर वह लॉंग ऑन की जगह मिड ऑन पर होते तो वह कैच कर सकते थे।
साथ ही उन्होंने अपनी कितबा में लिखा है, "मैं नहीं जानता कि इमरान खान को यह बात याद है या कोई आइडिया भी है कि मैंने कभी पाकिस्तान टीम के लिए क्षेत्ररक्षण किया था।"