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पैरा एशियन गेम्स: सुमित अंतिल ने लगातार दूसरी बार जीता स्वर्ण, भाला फेंक स्पर्धा में तीनों पदक भारत के नाम

Fri, 23 Oct 2026 06:31 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नागोया Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Fri, 23 Oct 2026 06:31 PM IST
सार

  • भारत के स्टार पैरा एथलीट सुमित अंतिल ने पैरा एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक का बचाव किया।
  • पुरुष भाला फेंक एफ 42-44/61-64 संयुक्त स्पर्धा में भारत ने पदकों का क्लीन स्वीप किया।
  • सुमित के स्वर्ण के अलावा महेंद्र गुर्जर ने रजत और संदीप ने कांस्य पदक अपने नाम किया।

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Indian para javelin thrower Sumit Antil defends javelin throw F64 gold at Para Asian Games
सुमित अंतिल - फोटो : X

विस्तार

भारत के स्टार पैरा भाला फेंक एथलीट सुमित अंतिल ने शुक्रवार को पैरा एशियन गेम्स में पुरुषों की एफ 42-44/61-64 संयुक्त स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर अपने खिताब का बचाव किया। वहींस इस स्पर्धा में भारत ने तीनों पदक अपने नाम किए। दो बार के पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता और विश्व रिकॉर्ड धारक 28 वर्षीय सुमित ने अपने दूसरे प्रयास में 72.46 मीटर दूर भाला फेंककर स्वर्ण पदक हासिल किया।
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सुमित ने बनाया विश्व रिकॉर्ड
सुमित ने 2023 के एशियाई पैरा खेलों में 73.29 मीटर के तत्कालीन विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद उन्होंने इस साल मई में 74.82 मीटर का नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। शुक्रवार को वह अपना रिकॉर्ड नहीं तोड़ सके, लेकिन एफ64 वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए अन्य खिलाड़ियों से आगे रहे। एफ42 वर्ग में हिस्सा लेने वाले महेंद्र गुर्जर ने 59.03 मीटर के प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीता, जबकि एफ44 वर्ग के संदीप संजय सरगर ने 64.48 मीटर भाला फेंककर कांस्य पदक हासिल किया।
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महेंद्र और संदीप को भी मिला पदक 
महेंद्र को कम दूरी के बावजूद रजत पदक मिला। संयुक्त स्पर्धाओं में खिलाड़ियों की रैंकिंग तय करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले आरएजेडए अंक में महेंद्र को बढ़त मिली, जिसके आधार पर उन्हें संदीप से ऊपर स्थान दिया गया। भाला फेंक और चक्का फेंक जैसी मैदान में होने वाली स्पर्धाओं में खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाने और मुकाबले को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एफ42, एफ44, एफ62 और एफ64 जैसे वर्गों को अक्सर एक संयुक्त स्पर्धा में शामिल किया जाता है।
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एफ42 और एफ44 वर्ग में निचले अंगों से संबंधित अक्षमता वाले वे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जो भाला फेंकने या दौड़ने के लिए कृत्रिम पैर का इस्तेमाल नहीं करते। एफ62 और एफ64 वर्ग में निचले अंगों से संबंधित अक्षमता वाले वे खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं, जो कृत्रिम पैर या पैरों की मदद से खड़े होकर खेलते हैं। इससे पहले, संदीप ने पुरुष 100 मीटर टी44 फाइनल में कांस्य पदक जीतकर भारत को एक और पदक दिलाया। संदीप ने फाइनल में 11.67 सेकेंड का समय लिया और वह तीसरे स्थान पर रहे।
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