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हॉकी विश्व कप में कोच ने बताया भारतीय टीम का प्लान, बोले- आक्रामक हॉकी पर होगा जोर

Tue, 04 Dec 2018 03:49 AM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, भुवनेश्वर
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, भुवनेश्वर Updated Tue, 04 Dec 2018 03:49 AM IST
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Indian hockey team will stick on aggressive game says Harendra Kumar
- फोटो : SELF

भारत के चीफ कोच हरेन्द्र सिंह का जोर यहां हॉकी विश्व कप में जोर आक्रामक हॉकी खेलने पर है। भारत के बेल्जियम के खिलाफ पूल सी का मैच ड्रॉ रहने के बाद उन्होंने अमर उजाला के सवाल में कहा, ‘हमारी ताकत आक्रामक हॉकी है। मेरा अपने खिलाड़ियों को बस यही गुरुमंत्र यही है कि मैच में बढ़त लेने के उसे महज बरकरार रखने की बजाय उसे बराबर बढ़ाने की बाबत सोचे। हमारी ताकत हमारा आक्रामक खेल है और हमारी लय है। हमें इसी पर भरोसा कर खेलना चाहिए। मैं अपन खिलाड़ियों से बराबर यही कहता हूं कि यदि मैच में भारतीय टीम को 2-1 की बढ़त हासिल है जो उसे महज बरकरार रखने की बजाय 3-1, 4-1 करने की बाबत सोचना चाहिए। मेरा मानना है कि मुर्दे के ताबूत में इतनी कील ठोक दो की वह उससे उबर ही नहीं पाए। आखिर तक प्रतिद्वंद्वी टीम के गोल पद हमले और बस हमले।

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उन्होंने कहा, ‘अब हमारी भारतीय टीम के जहां तक अब पूल में टॉप कर सीधे क्वॉर्टर फाइनल में पहुंचने की बात है तो जब हम 8 दिसंबर को कनाडा के खिलाफ अपना अंतिम पूल मैच खेलने उतरेंगे तो हमारे सामने लक्ष्य और तस्वीर एकदम साफ होगी। हमें मालूम होगा कि हमारी टीम को कितने गोल करने हैं। हमारा गोल अंतर 5 का है जबकि बेल्जियम का 1। दरअसल एक मैच ही फैसला कर देगा कि हम सीधे क्वॉर्टर फाइनल में खेलेंगे या फिर क्रॉसओवर से। मै बजाय अन्य टीमों की बाबत सोचने अपनी रणनीति पर काबिज रह कर खेलें। हम गलतियां नहीं करेंगे और अपनी आक्रामक हॉकी खेलेंगे तो हम जरूर कामयाब होंगे। अपने खिलाड़ियों के आज की जमाने की हॉकी के लिए एकदम फिट होने का श्रेय मैं अपने टीम प्रबंधन खासतौर पर रॉबिन आरॅकेल को देना चाहूंगा। हमारे मौजूदा टीम इस टूर्नामेंट में पूरा मैच एक ही जोश और दम से खेलने का दम रखती है। हमारे मौजूदा टीम में ऐसे फुलबैक और ड्रैग र लकर हैं जो कि गोल की मुस्तैदी से हिफाजत करने के साथ अपने गोल से गेंद को र लक कर 90 मीटर से ज्यादा यानी प्रतिद्वंद्वी टीम की डी में पहुंचाने तक का दम रखते हैं। हमारे वरुण कुमार और हरमनप्रीत सिंह जैसे ड्रैग र लकरों ने अब तक इस विश्व कप में दो मैच हुए हैं इनमें लंबे लक के साथ तेज स्लैप शॉट का बेहतरीन ढंग से इस्तेमाल किया। हमारी टीम अब किसी भी टीम के लगातार हमलों को नाकाम करने के साथ प्रतिद्वंद्वी टीम के गोल पर हमलों का तांता बांध कर खुद को मुश्किल हालात से उबारने का दम रखती है।

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हॉकी को क्रिकेट की तरह छोटे प्रारूप की जरूरत नहीं

यूथ ओलंपिक में फाइव ए साइड प्रारूप की सफलता से उत्साहित अंतरराष्टीय हॉकी महासंघ अगले साल इसे बड़े पैमाने पर लांच करने की तैयारी में है लेकिन रिक चार्ल्सवर्थ जैसे अनुभवी प्रशिक्षकों का मानना है कि हॉकी को क्रिकेट की तरह छोटे प्रारूप की जरूरत नहीं है। एफआईएच अगले साल हॉकी फाइव का नुमाइशी टूर्नामेंट शुरू करने की सोच रहा है लेकिन उसने यह भी कहा कि ओलंपिक में 11 खिलाड़ियों के प्रारूप की जगह इसे नहीं दी जाएगी।

चार्ल्सवर्थ ने कहा कि कई फैसले पैसे की वजह से लिए जा रहे हैं जो दुर्भाग्यपूर्ण है। मुझे चिंता हो रही है। कुछ फैसले अब खेल के लिए नहीं बल्कि प्रायोजकों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं जो काफी खतरनाक है। उन्होंने कहा कि व्यवसाय पर ज्यादा ध्यान देने से दर्शक खेल से दूर हो जाएंगे। न्यूजीलैंड के कोच शेन मैकलियोड ने कहा कि यह बदलाव समय की जरूरत है लेकिन हॉकी फाइव को पारंपरिक प्रारूप पर हावी नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेल में नई पहल होना अच्छा है। क्वार्टर प्रणाली से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। हॉकी फाइव का प्रयोग भी अच्छा है लेकिन पारंपरिक प्रारूप से बेहतर नहीं।

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