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भारतीय हॉकी टीम में नहीं अनुभव की कोई कमी, उस्ताद हरेन्द्र के मार्गदर्शन में जीत सकती है गोल्ड

Sun, 05 Aug 2018 05:26 AM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 05 Aug 2018 05:26 AM IST
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Indian hockey team is strong enough to win gold at Asian games 2018

कप्तान और दुनिया के बेहतरीन गोलरक्षकों में एक पीआर श्रीजेश के साथ पूरी भारतीय पुरुष हॉकी टीम 19 अगस्त से जकार्ता में शुरू होने वाले एशियाई हॉकी खेलों में अपना स्वर्ण पदक बरकरार रखने के लिए बेंगलुरु में चल रहे आखिरी तैयारी शिविर में जुटी है। 

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तीन हॉकी टेस्ट सीरीज के बाद मिले करीब एक हफ्ते के आराम के बाद चीफ हॉकी कोच हरेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में भारतीय टीम एशियाई खेलों से पहले में जो मामूली खामियां रही उनसे निजात पाने में शिद्दत  से जुटी है। हरेन्द्र के मार्गदर्शन में फिलहाल टीम के सुबह , दोपहर और शाम तीन सत्र में जमकर बेंगलुरू के साई सेंटर में पसीना बहा रही है।
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भारतीय पुरुष हॉकी टीम का फोकस एशियाई खेलों से पहले खासतौर पर डी में बेहतर फिनिशिंग पर है। भारत के कप्तान गोलरक्षक पीआर श्रीजेश ने 'अमर उजाला' से कहा, 'हमारी टीम एशियाई खेलों के लिए विश्वास से भरी है। हमारी पुरुष टीम एशियाई खेलों में भले ही मौजूदा चैंपियन  है लेकिन इसमें चुनौती कभी आसान नहीं होती है क्योंकि हर टीम की शैली अलग होती है।  जिस शिद्दत से भारतीय टीम ने मेहनत की है उससे मुझे पूरा विश्वास है कि स्ट्रक्चर पर काबिज रह हम इस बार भी टीम एशियाई खेलों में स्वर्ण पर कब्जा बरकरार रखने में कामयाब होगी।'
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वह बताते हैं, 'हमारे पास पेनल्टी कॉर्नर को भुनाने के लिए चार ड्रैग फ्लिकर हैं -रूपिंदर, हरमनप्रीत सिंह, वरुण कुमार और अमित रोहिदास हैं। संयोग से ये चारों बहुत मुस्तैदी से भारत की किले की चौकसी की जिम्मेदारी संभालने में सक्षम हैं। रक्षापंक्ति के इन चारों मजबूत प्रहरियों की मौजूदगी में मुझ पर दबाव काफी कम होता है। हमारी टीम की अग्रिम पंक्ति, मध्यपंक्ति और रक्षापंक्ति के बीच बेहतरीन तालमेल उसे मैदान पर बेहतरीन प्रदर्शन को प्रेरित करती है।'

श्रीजेश कहते हैं, 'एफआईएच रैंकिंग में एक पायदान उपर चढ़ कर पांचवें स्थान पर पहुंचने से हमें एशियाई खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने का हौसला मिलेगा। रैंकिंग में जितने पायदान टीम उपर चढ़ती पर उस पर उतना ही और बेहतर प्रदर्शन करने की भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। मध्यपंक्ति में सरदार सिंह, रक्षापंक्ति में वीरू (वीरेन्द्र लाकड़ा) और रूपिंदर पाल तथा अग्रिम पंक्ति में आकाशदीप का अनुभव हमारी टीम के एशियाई खेलों में अतिरिक्त उर्जा देगा क्योंकि ये सभी दबाव को बेहतर ढंग से झेलना जानते हैं।


इनका चारों का अनुभव टीम के नौजवान खिलाडियों को दबाव में मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने को प्रेरित करता है। हमारी टीम के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि हममें ज्यादातर लंबे समय से साथ साथ खेल रहे हैं और सभी के बीच बेहतरीन तालमेल है। हमारे पास ऐसा कोर ग्रुप है जिसमें किसी की भी कोई भी कभी जरूरत पडने पर जगह भर सकता है। हम मैच दर मैच खेल बेहतर और बेहतर करने की कोशिश करेंगे और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के अपने मकसद को पाकर सीधे ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने में कामयाब होंगे।'

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