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अगर ये कोच होते तो इतिहास रचने वाले जिक्सन नहीं होते टीम इंडिया में शामिल

Wed, 11 Oct 2017 02:12 AM IST
हेमंत रस्तोगी, नयी दिल्ली, अमर उजाला
हेमंत रस्तोगी, नयी दिल्ली, अमर उजाला Updated Wed, 11 Oct 2017 02:12 AM IST
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jeakson singh reveals the truth behind his name
जिक्सन सिंह
फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के कोच जर्मनी के निकोलाई एडम होते तो वर्ल्ड कप में देश के लिए पहला गोल कर इतिहास पुरुष बनने वाले जिक्सन सिंह शायद टीम में नहीं होते। यह सच्चाई है कि जिक्सन को एडम ने दो साल पहले फुटबालरों की स्काउटिंग के  दौरान अपनी कोर टीम में जगह नहीं दी थी। 
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यह पुर्तगाली कोच लुई नार्टन डि माटोस ही थे, जिन्होंने सात माह पूर्व मणिपुर के इस फुटबॉलर को अपनी योजनाओं में शामिल किया। जिक्सन का माटोस की नजरों में चढ़ने का सबसे बड़ा कारण उनकी लंबाई थी। एडम ने उन्हें अत्यधिक लंबाई के चलते चयनित नहीं किया और माटोस लंबे फुटबॉलर चाहते थे। 
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माटोस ने जब इंटरनेशनल फुटबॉलर अभिषेक यादव से कहा कि उन्हें लंबा मिडफील्डर चाहिए, तब वो जैक्सन को उनके पास लाए। माटोस ने फौरन उनकी प्रतिभा को पहचान और कोर टीम में जगह दी। जैक्सन का कहना है कि उस दौरान उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। मिनर्वा औ्रर आई लीग में उनकी टीम चेन्नई सिटी एफसी में मिडफील्ड की बारीकियां सीखींए जो उनके चयन में काम आईं।
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वह साफ करते हैं कि उनका नाम जैक्सन नहीं बल्कि जिक्सन है। गोल करने पर उन्हें खुशी तो है, लेकिन हार ने इसी खुशी को खत्म कर दिया है। इससे वह निराश हैं।

अचानक पोजीशन बदली तब हुआ गोल

jeakson singh reveals the truth behind his name
जिक्सन सिंह
जिक्सन खुलासा करते हैं कि कॉर्नर पर वह अमूमन दूसरे पोस्ट पर खड़े होते हैं, लेकिन रहीम अली ने उन्हें बोला वह पहले पोस्ट पर जाएं और वह दूसरे पर चले जाते हैं। उन्होंने यही किया। पोजीशन बदलने के दौरान ही उन्हें लग रहा था कि उनके खाते में गोल आने जा रहा है। स्टालिन की किक इतनी बढिय़ा थी कि उन्होंने गोल भेद दिया।

सिंधु की ओलंपिक कहानी देती है प्रेरणा

जिक्सन के मुताबिक उनकी इस वर्ल्ड कप के ड्रॉ के दौरान मुंबई में पीवी सिंधु से मुलाकात हुई थी। उन्होंने पूरी टीम को अपने ओलंपिक मेडल की कहानी सुनाई थी। उन्होंने इस मेडल के लिए कितना त्याग किया था वह भी बताया था। उन्होंने बताया था कि किस तरह कोच गोपी ने उनसे मोबाइल ले लिया था। यह सब बातें उन्हें भी कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देती हैं।

मां बेचती है सब्जी पिता को हुआ ब्रेन स्ट्रोक

जिक्सन के पिता उन्हें और टीम के कप्तान अमरजीत  को बचपन में फुटबॉल सिखाते थे। पिता को अचानक ब्रेन स्ट्रोक पड़ गया, जिससे परिवार की हालत खराब हो गई। उनकी मां को 25 किलोमीटर दूर जाकर सब्जी तक बेचनी पड़ी। जिक्सन बताते हैं कि कल के मैच के बाद मां से बात कर वह भावुक हो गए।  
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