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Samar Badru Death: भारत के महान फुटबॉल खिलाड़ी समर बदरू बनर्जी का निधन, 1956 में किया था ऐतिहासिक कारनामा
Sat, 20 Aug 2022 02:02 PM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Sat, 20 Aug 2022 02:02 PM IST
सार
समर बदरू बनर्जी की अगुआई में भारतीय टीम ने 1956 ओलंपिक में चौथे स्थान तक का सफर तय किया था, लेकिन उनकी टीम पदक जीतने से चूक गई थी। बदरू दा ने 92 साल की उम्र में आखिरी सांस ली।
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समर बदरू बनर्जी
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान समर बदरू बनर्जी का निधन हो चुका है। 1956 ओलंपिक में भारतीय फुटबॉल टीम ने उनकी अगुवाई में चौथे नंबर तक का सफर तय किया था। ओलंपिक के इतिहास में यह भारतीय फुटबॉल टीम का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है। 92 साल के समर बदरू को 'बदरू दा' के नाम से जाना जाता था और वे लंबे समय से बीमार थे।
बदरू दा को अलजाइमर, अजोटेमिया, उच्च रक्तचाप की समस्या थी। 27 जुलाई को कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद उन्हें बांगर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनके निधन पर दुख जताया है। ममता ने लिखा "मशहूर फुटबॉलर और बेहतरीन खिलाड़ी समर बनर्जी के निधन से आहत हूं। पश्चिम बंगाल सरकार ने उन्हें 2016-17 में 'लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया। मैं उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं। वह कई लोगों के लिए प्रेरणा रहेंगे।"
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मोहन बागान के सचिन देवासीष दत्ता ने बताया "उनकी तबियत खराब होने पर उन्हें राज्य के एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। राज्य के खेल मंत्री अरूप बिस्वास भी मामले पर नजर रखे हुए थे। उन्होंने तड़के दो बजकर 10 मिनट पर आखिरी सांस ली। वो हमारे प्यारे बदरू दा थे और उन्हें 200 में मोहग बागान रत्न मिला था। यह एक बड़ी क्षति है।"
अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर के मोहन बागान क्लब ले जाया गया।
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बदरू दा को अलजाइमर, अजोटेमिया, उच्च रक्तचाप की समस्या थी। 27 जुलाई को कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद उन्हें बांगर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनके निधन पर दुख जताया है। ममता ने लिखा "मशहूर फुटबॉलर और बेहतरीन खिलाड़ी समर बनर्जी के निधन से आहत हूं। पश्चिम बंगाल सरकार ने उन्हें 2016-17 में 'लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया। मैं उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं। वह कई लोगों के लिए प्रेरणा रहेंगे।"
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मोहन बागान के सचिन देवासीष दत्ता ने बताया "उनकी तबियत खराब होने पर उन्हें राज्य के एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। राज्य के खेल मंत्री अरूप बिस्वास भी मामले पर नजर रखे हुए थे। उन्होंने तड़के दो बजकर 10 मिनट पर आखिरी सांस ली। वो हमारे प्यारे बदरू दा थे और उन्हें 200 में मोहग बागान रत्न मिला था। यह एक बड़ी क्षति है।"
अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर के मोहन बागान क्लब ले जाया गया।
अब तक तीन ओलंपिक खेली है भारतीय फुटबॉल टीम
भारतीय फुटबॉल टीम ने अब तक तीन बार ओलंपिक में भाग लिया है। इनमें 1956 का प्रदर्शन सबसे बेहतरीन रहा है। इस ओलंपिक में भारत को कांस्य पदक के मैच में बुल्गेरिया के खिलाफ 0-3 से हार का सामना करना पड़ा था। इसे भारत में फुटबॉल का स्वर्णिम दौर माना जाता है। इस प्रतियोगिता के पहले मैच में भारत को वॉकओवर मिला था, जबकि दूसरे मैच में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को 4-2 से हराया था। इस टीम में पीके बनर्जी, नेविल डेसूजा और जे किट्टू कृष्णास्वामी जैसे खिलाड़ी थे।
हालांकि, अंतिम चार में भारत को युगोस्लाविया के खिलाफ 1-4 से हार का सामना करना पड़ा था और फाइनल में जगह नहीं बना पाया था। इसके बाद कांस्य पदक के मुकाबले में भी भारत हार गया था और पदक से चूक गया था।
कोच के रूप में भी किया कमाल
समर बदरू बनर्जी ने बतौर कोच मोहन बागान को कई ट्रॉफी जिताई। इसमें 1953 में क्लब का पहला डुरंड कप भी शामिल है। इसके अलावा 1955 में रोवर्स कप भी जिताया। खिलाड़ी के रूप में उन्होंने दो बार संतोष ट्रॉफी जीती है। वहीं, 1962 में कोच रहते हुए अपनी टीम को चैंपियन बनाया। इसके अलावा वो भारतीय टीम के चयनकर्ता भी रहे।
उनके निधन के साथ ही भारतीय फुटबॉल के कई महान सितारों का तीन साल के अंदर निधन हो चुका है। पीके, चुनी गोस्वामी, सुभाष भौमिक, सुरजीत सेनगुप्ता का निधन तीन साल के अंदर हुआ है।
भारतीय फुटबॉल टीम ने अब तक तीन बार ओलंपिक में भाग लिया है। इनमें 1956 का प्रदर्शन सबसे बेहतरीन रहा है। इस ओलंपिक में भारत को कांस्य पदक के मैच में बुल्गेरिया के खिलाफ 0-3 से हार का सामना करना पड़ा था। इसे भारत में फुटबॉल का स्वर्णिम दौर माना जाता है। इस प्रतियोगिता के पहले मैच में भारत को वॉकओवर मिला था, जबकि दूसरे मैच में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को 4-2 से हराया था। इस टीम में पीके बनर्जी, नेविल डेसूजा और जे किट्टू कृष्णास्वामी जैसे खिलाड़ी थे।
हालांकि, अंतिम चार में भारत को युगोस्लाविया के खिलाफ 1-4 से हार का सामना करना पड़ा था और फाइनल में जगह नहीं बना पाया था। इसके बाद कांस्य पदक के मुकाबले में भी भारत हार गया था और पदक से चूक गया था।
कोच के रूप में भी किया कमाल
समर बदरू बनर्जी ने बतौर कोच मोहन बागान को कई ट्रॉफी जिताई। इसमें 1953 में क्लब का पहला डुरंड कप भी शामिल है। इसके अलावा 1955 में रोवर्स कप भी जिताया। खिलाड़ी के रूप में उन्होंने दो बार संतोष ट्रॉफी जीती है। वहीं, 1962 में कोच रहते हुए अपनी टीम को चैंपियन बनाया। इसके अलावा वो भारतीय टीम के चयनकर्ता भी रहे।
उनके निधन के साथ ही भारतीय फुटबॉल के कई महान सितारों का तीन साल के अंदर निधन हो चुका है। पीके, चुनी गोस्वामी, सुभाष भौमिक, सुरजीत सेनगुप्ता का निधन तीन साल के अंदर हुआ है।