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एशियाई पैरा गेम्स: भारत को शॉटपुट में तीनों पदक; सचिन ने गेम्स रिकॉर्ड के साथ जीता स्वर्ण; यासिर-परवीन का कमाल
Wed, 21 Oct 2026 09:07 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Wed, 21 Oct 2026 09:07 AM IST
सार
सचिन खिलारी ने एशियाई पैरा गेम्स 2026 की पुरुषों की एफ46 शॉटपुट स्पर्धा में आखिरी प्रयास में 15.87 मीटर का थ्रो करके गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। मोहम्मद यासिर ने रजत और परवीन ने कांस्य पदक जीता। भारत ने स्पर्धा के तीनों पदक अपने नाम किए।
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सचिन खिलारी
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत के पैरा एथलीट सचिन सरजेराव खिलारी ने एशियाई पैरा गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। बुधवार को नागोया में पुरुषों की एफ46 शॉटपुट स्पर्धा में सचिन ने अपने छठे और आखिरी प्रयास में 15.87 मीटर दूर गोला फेंककर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। उनके इस प्रदर्शन के साथ भारत ने स्पर्धा में स्वर्ण, रजत और कांस्य तीनों पदक जीतकर क्लीन स्वीप किया।
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पेरिस पैरालंपिक 2024 के रजत पदक विजेता सचिन ने एशियाई पैरा गेम्स में अपना पिछला स्वर्ण भी बरकरार रखा। उन्होंने चीन में हुए पिछले संस्करण में स्वर्ण पदक जीता था। इस बार उन्होंने 15.67 मीटर के पुराने गेम्स रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए 15.87 मीटर का नया रिकॉर्ड कायम किया। भारत के मोहम्मद यासिर ने तीसरे प्रयास में 15.06 मीटर का थ्रो करके रजत पदक जीता, जबकि परवीन 14.94 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस तरह पोडियम के तीनों स्थान भारतीय खिलाड़ियों के नाम रहे।
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सचिन खिलारी
- फोटो : Twitter
आखिरी थ्रो में सचिन ने पलटी बाजी
सचिन खिलारी का स्वर्ण पदक जीतने वाला प्रदर्शन खास रहा। उन्होंने अपने छठे और आखिरी प्रयास में 15.87 मीटर दूर गोला फेंका और प्रतियोगिता का पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। इससे पहले गेम्स रिकॉर्ड 15.67 मीटर था। सचिन ने दबाव के बीच अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और लगातार दूसरी बार एशियाई पैरा गेम्स में इस स्पर्धा का स्वर्ण जीतने में सफल रहे। यासिर और परवीन ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की ऐतिहासिक सफलता पूरी की।
नौ साल की उम्र में हुआ हादसा, फिर भी नहीं मानी हार
महाराष्ट्र के सांगली जिले के करगनी गांव में 23 अक्तूबर 1989 को जन्मे सचिन खिलारी का जीवन नौ साल की उम्र में हुए एक साइकिल हादसे के बाद बदल गया था। इस हादसे के कारण उनके बाएं हाथ की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान पहुंचा और हाथ की गतिविधियां सीमित हो गईं।
हालांकि, सचिन ने इन चुनौतियों को अपने खेल के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने शुरुआत में भाला फेंक में हिस्सा लिया, लेकिन कंधे की चोट के बाद शॉटपुट को अपना मुख्य खेल बना लिया। लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।
सचिन खिलारी का स्वर्ण पदक जीतने वाला प्रदर्शन खास रहा। उन्होंने अपने छठे और आखिरी प्रयास में 15.87 मीटर दूर गोला फेंका और प्रतियोगिता का पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। इससे पहले गेम्स रिकॉर्ड 15.67 मीटर था। सचिन ने दबाव के बीच अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और लगातार दूसरी बार एशियाई पैरा गेम्स में इस स्पर्धा का स्वर्ण जीतने में सफल रहे। यासिर और परवीन ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की ऐतिहासिक सफलता पूरी की।
नौ साल की उम्र में हुआ हादसा, फिर भी नहीं मानी हार
महाराष्ट्र के सांगली जिले के करगनी गांव में 23 अक्तूबर 1989 को जन्मे सचिन खिलारी का जीवन नौ साल की उम्र में हुए एक साइकिल हादसे के बाद बदल गया था। इस हादसे के कारण उनके बाएं हाथ की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान पहुंचा और हाथ की गतिविधियां सीमित हो गईं।
हालांकि, सचिन ने इन चुनौतियों को अपने खेल के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने शुरुआत में भाला फेंक में हिस्सा लिया, लेकिन कंधे की चोट के बाद शॉटपुट को अपना मुख्य खेल बना लिया। लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।
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सचिन खिलारी
- फोटो : Twitter
पैरालंपिक रजत और दो बार के विश्व चैंपियन
सचिन खिलारी ने पेरिस पैरालंपिक 2024 में पुरुषों की एफ46 शॉटपुट स्पर्धा में 16.32 मीटर के एशियाई रिकॉर्ड थ्रो के साथ रजत पदक जीता था। वह 2023 और 2024 में लगातार दो विश्व चैंपियनशिप खिताब भी जीत चुके हैं। अब एशियाई पैरा गेम्स में स्वर्ण और गेम्स रिकॉर्ड के साथ उन्होंने अपनी उपलब्धियों में एक और बड़ी सफलता जोड़ ली है। सचिन कोच सत्यनारायण के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेते हैं। उन्हें भारत की टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) से भी सहायता मिली है। खेल में योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
सचिन खिलारी ने पेरिस पैरालंपिक 2024 में पुरुषों की एफ46 शॉटपुट स्पर्धा में 16.32 मीटर के एशियाई रिकॉर्ड थ्रो के साथ रजत पदक जीता था। वह 2023 और 2024 में लगातार दो विश्व चैंपियनशिप खिताब भी जीत चुके हैं। अब एशियाई पैरा गेम्स में स्वर्ण और गेम्स रिकॉर्ड के साथ उन्होंने अपनी उपलब्धियों में एक और बड़ी सफलता जोड़ ली है। सचिन कोच सत्यनारायण के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेते हैं। उन्हें भारत की टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) से भी सहायता मिली है। खेल में योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
सचिन खिलारी
- फोटो : Twitter
इंजीनियरिंग की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं के विद्यार्थियों को भी पढ़ाया
सचिन खिलारी ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। खेल के अलावा वह अतिथि शिक्षक के रूप में भी काम कर चुके हैं और महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) तथा संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों की मदद कर चुके हैं। खेल और शिक्षा के बीच संतुलन बनाने वाले सचिन की कहानी संघर्ष, अनुशासन और लगातार बेहतर करने की कोशिश का उदाहरण है। नागोया में उनका रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन इसी लंबे सफर की एक और बड़ी उपलब्धि है।
एफ46 वर्ग क्या है?
एफ46 वर्ग उन फील्ड एथलीटों के लिए है, जिनके एक हाथ की कोहनी के ऊपर या नीचे अंग-विच्छेदन हुआ हो अथवा ऊपरी अंग में इसके समान स्तर की दिव्यांगता हो। इस वर्ग के खिलाड़ी खड़े होकर थ्रो करते हैं और कूल्हों तथा पैरों की मदद से फेंकने की ताकत पैदा करते हैं। सचिन ने इसी वर्ग में 15.87 मीटर का थ्रो करके स्वर्ण पदक जीता। यासिर और परवीन के रजत और कांस्य पदक ने भारत के लिए इस स्पर्धा को यादगार बना दिया।
सचिन खिलारी ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। खेल के अलावा वह अतिथि शिक्षक के रूप में भी काम कर चुके हैं और महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) तथा संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों की मदद कर चुके हैं। खेल और शिक्षा के बीच संतुलन बनाने वाले सचिन की कहानी संघर्ष, अनुशासन और लगातार बेहतर करने की कोशिश का उदाहरण है। नागोया में उनका रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन इसी लंबे सफर की एक और बड़ी उपलब्धि है।
एफ46 वर्ग क्या है?
एफ46 वर्ग उन फील्ड एथलीटों के लिए है, जिनके एक हाथ की कोहनी के ऊपर या नीचे अंग-विच्छेदन हुआ हो अथवा ऊपरी अंग में इसके समान स्तर की दिव्यांगता हो। इस वर्ग के खिलाड़ी खड़े होकर थ्रो करते हैं और कूल्हों तथा पैरों की मदद से फेंकने की ताकत पैदा करते हैं। सचिन ने इसी वर्ग में 15.87 मीटर का थ्रो करके स्वर्ण पदक जीता। यासिर और परवीन के रजत और कांस्य पदक ने भारत के लिए इस स्पर्धा को यादगार बना दिया।