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आपके भीतर ही मौजूद है रोग मुक्ति का उपाय

Thu, 27 Sep 2012 03:30 PM IST
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
राकेश/इंटरनेट डेस्क। Updated Thu, 27 Sep 2012 03:30 PM IST
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your internal thinking will heal from disease
कई बार हमें ऐसा लगने लगता है कि भाग्य आपका साथ नहीं दे रहा है, जीवन की सारी तकलीफ सिर्फ आपके लिए है। लेकिन अगर आप एक मंत्र को याद कर लें तो जीवन में न आपको रोग हरा सकता है न काम का दबाव, शत्रु भी आपका कुछ बिगाड़ नहीं सकता।
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आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि इसी मंत्र के बल पर युवराज सिंह, लांस आर्मस्ट्रांग और मनोचिकित्सक हेरॉल्ड शेरमन कैंसर जैसे गंभीर रोग को मात देने में सफल रहे। यह मंत्र है 'मन के हारे हार है, मन के जीते जीत' यानी जीत और हार आपके मन पर निर्भर करता है।
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हेरॉलड शेरमन ने अपनी पुस्तक 'नो योर ओन माइंड' में इस बात का उल्लेख किया है। इस पुस्तक में हेरॉल्ड शेरमन ने अपने जीवन की उस घटना का जिक्र किया है जब टेनिस खेलते हुए उनके घुटने में जबरदस्त चोट लगी। डॉक्टरों ने घुटने का परीक्षण करके बताया कि इंफैक्शन हो गया है और कैंसर की संभावना है।
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डॉक्टरों ने इस समस्या से छुटकारा पाने का एक मात्र तरीका बताया कि पैर काटना पड़ेगा। हरॉल्ड शेरमन ने डॉक्टर से एक दिन का समय मांगा। उस रात शेरमन अपना ध्यान केन्द्रित करके घुटने के फोड़े के बारे में सोचते रहे। उन्होंने सोचना शुरू किया कि फोड़ा फट रहा है और मवाद बह गया। इसके बाद उनका पैर स्वस्थ हो गया और वह चलने लगे हैं।

ऐसा सोचते-सोचते शेरमन कब सो गये उन्हें पता ही नहीं चला। सुबह जब उनकी आंख खुली तो सचमुच ऐसा हो चुका था। उनके घुटने के फोड़े से मवाद बह चुका था और वह अच्छी तरह चल पा रहे थे। हरॉल्ड शेरमन के डॉक्टर इस चमत्कार को देखकर हैरान रह गये।

युवराज सिंह और लांस आर्मस्ट्रांग भी यह मानते हैं कि आत्मबल के कारण ही वह कैंसर को मात देने में सफल हुए। वैज्ञानिक भी इस तथ्य को मानते हैं कि दवाओं से ज्यादा असर विश्वास में है। अगर आप यह मान लें कि आपको जो दवाईयां दी जा रही है उससे आप स्वस्थ हो रहे हैं तो इसका आपके स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर दिखने लगता है।

ऐसा ही एक शोध अमेरिकी वैज्ञानिकों ने किया जो ‘ऐनल्स ऑफ फैमिली हिस्ट्री’ नामक चिकित्सा पत्रिका में प्रकाशित हुआ। इस शोध में सात सौ लोगों को शामिल किया गया था जो सर्दी-जुकाम से पीड़ित थे। इनमें से कुछ लोगों को यह कह कर दवाईयां दी गयी कि, जो दवाई उन्हें दी जा रही है इससे सर्दी-जुकाम जल्दी ठीक हो जाएगा। जबकि यह दवाई सर्दी-जुकाम की नहीं थी।

कुछ लोगों को कोई दवाई नहीं दी गयी। परिणाम यह हुआ कि जो लोग किसी अन्य चीज की दवाई सर्दी-जुकाम की दवाई समझकर खा रहे थे उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ। जिन्हें दवाई नहीं दी गयी थी वह लंबे समय तक सर्दी-जुकाम से पीड़ित रहे।

बर्नी सीगल ने अपनी पुस्तक 'लव, मेडिसन एंड मिरैकल' में एक ऐसी कहानी का जिक्र किया है जिसमें एक रोगी को सादे पानी का इंजेक्शन यह कह कर दिया जा रहा था कि यह बेहतरीन दवाई है जिससे उसका फोड़ा ठीक हो जाएगा।


जो फोड़ा किसी दवाई से ठीक नहीं हो रहा था वह पानी के इंजेक्शन से ठीक हो गया। यह बताता है कि मन के हारे हार है मन के जीते जीत। इसलिए कभी भी निराशा को अपने ऊपर हावी न होने दें। विश्वास कीजिए जीत आपकी होगी।
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