फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Wellness ›   why women are not allow in temple

मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर क्या कहते हैं हमारे वेद पुराण

Wed, 27 Jan 2016 04:36 PM IST
Updated Wed, 27 Jan 2016 04:36 PM IST
विज्ञापन
why women are not allow in temple

वेदों में कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं जिससे यह मालूम होता है कि उन दिनों महिलाओं को पुरुषों के समान ही हर क्षेत्र में अधिकार प्राप्त था। यहां तक ही महिलाएं पुरुषों से समान ऋषि परंपरा को अपनाकर गुरूकुल तक चला सकती थी। वैदिक समाज में पुत्र के समान ही पुत्री को स्नेह-दुलार एवं आदर-सम्मान दिया जाता था। (श. 3/31/2) परिवार में कन्याएं अपने आदर्श गुणों को विकसित करती हुई प्रायः माता के अनुशासन में रहती थी।

विज्ञापन


माता के साथ वे गृहकार्यों को सीखती थी व उनको सहायता देती थी।(ऋ. 3/55/12) वैदिक कन्याएं कृषि कार्य में भी पिता के साथ सहयोग करती थी। अपाला को अपने पिता के खेतों में अच्छी फसल के लिए इन्द्र से याचना करते हुए चित्रित किया गया है। (ऋ. 8/81/5-13) ऋग्वेद में कन्या को उच्च स्थान प्राप्त था, जिसका उदाहरण ‘विसूनृता ददृशेदीयते घृतम्’ (ऋ. 1/135/7) अर्थात् जहां घृत बहता है, वहां हर्ष से प्रफुल्लित कुमारी देखी जाती है। इस तरह कन्याओं का सम्मान होने से वे सन्तुष्ट होकर अनेक समाजिक कार्यों में सहयोग प्रदान करती थी।

विज्ञापन

ऋग्वेद में पुत्र एवं पुत्री के संबंध में व‌िचार

why women are not allow in temple

वैदिक काल में कन्याओं को शुभ तथा विशेष शक्ति से युक्त माना जाता था। इसकी पुष्टि उजस् को दिव की पुत्री निर्देशित करने से होती है। ऋग्वेद में पुत्र एवं पुत्री के दीर्घायु कामना का भी उल्लेख आता है। (ऋ. 4/31/8)।

ऋग्वेद में प्रभूत संख्या में वाणों को धारण करने वाले त्रषुधि की प्रशंसा ‘अनेक पुत्रियों के पिता’ कहकर की गई है। (ऋ. 6/75/5)। अन्यत्र पुत्र को पिता के सत्कार्यों का कर्त्ता और पुत्री को आदर करने योग्य कहा गया है।

कौषीतकि ब्राह्मण में एक कुमारी गंधर्व गृहीत अग्निहोत्र में पारंगत बतायी गयी है। (कौ.ब्रा.2/9) बालिकाओं के लिए बालकों की ही भाँति शिक्षा ग्रहण करना आवश्यक थी (अथर्व. 11/5/14)। बालिकाएं ब्रह्मचर्य का पालन करती हुई विविध विद्याओं में पारंगत होती थी। आध्यात्मिक ज्ञान के क्षेत्र में बृहस्पति भगिनी, भुवना, अपर्णा, एकपर्णा, एकपाटला, मैना, धारिणी, संमति आदि कन्याओं का उल्लेख आता है।

ये सभी ब्रह्मवादिनी थी। ऐसी कन्याओं का भी उल्लेख आता है जिन्होंने तपस्या के बल पर अभीष्ट वर की प्राप्ति की, यथा उमा, धर्मव्रता आदि। यही नहीं गृह में निवास करती हुई कन्याएं भी गृहस्थ शिक्षा से अवगत हुआ करती थी।

जनेऊ संस्कार में स्‍त्री का महत्व

why women are not allow in temple

यज्ञ सम्पादित करने वाली नारियों में विश्ववारा का नाम सर्वप्रथम उल्लेखनीय है। वह प्रातःकाल स्वयं यज्ञ प्रारम्भ कर देती थी। (ऋ. 5/281)। कन्या द्वारा घर में यज्ञ का वर्णन वेद से प्राप्त होता है (ऋ. 8/91/1)। गृहस्थ में अर्धांगिनी के रूप में दैनिक धार्मिक कार्यों में भी नारी को प्रमुख माना जाता था। उसे दया की देवी स्वीकार किया गया है।

इसीलिए उपनयन संस्कार के समय बालक घर की स्त्रियों से ही भिक्षा माँगता था (मनु. 2/50)। राम के युवराज पद अभिषेक के समय कौशल्या ने यज्ञ संपादित किया था (रामायण 2/20/15)। बाली के सुग्रीव से युद्ध के लिए जाते समय उसकी पत्नी तारा भी यज्ञ कर रही थी। (रामायण 4/16/18)। पाण्डव जननी माता कुन्ती भी अथर्ववेद की पंडिता थी (महाभारत 3/3/5/20)।

विज्ञापन

वेदों में भेद नहीं तो अब क्यों?

why women are not allow in temple

पुरातन युग की नारी सुगृहिणी होने के साथ पति के सामाजिक एवं राजनैतिक जीवन में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। मनु ने स्पष्ट रूप से स्त्री को राज्य संचालन के योग्य माना है। वेद में भी स्त्री के लिए कई स्थलों पर पुरंधि शब्द का उल्लेख आता है- ‘पुरंनगरं दधातीति पुराँधि’ अर्थात्- जो नगर की रक्षा और पोषण करे।

नगरों के प्रबंधन, आंतरिक रक्षा एवं सफाई आदि ये कार्य स्त्रियां ही करती थीं। स्त्रियां सभा एवं समिति की सदस्याएं भी चुनी जाती थी। अथर्ववेद में कई स्थान पर इसका संकेत मिलता है (अथर्व. 7/38/4, 12/4/46, 12/3/52)। जिससे स्पष्ट होता है कि वैदिक युग में पुरुषों की भांति राज्य की सभा व समितियों में स्त्रियाँ भाग ले सकती थीं। वहां क‌िसी प्रकार का व‌िभेद नहीं था।

और जब हम हर क्षेत्र में स्‍त्री पुरुष समानता की बात कर रहे हैं तो ईश्वर के दरबार में भेद-भाव का क्‍या प्रयोजन है इस व‌िषय पर क्या अब व‌िचार करने की जरुरत नहीं है?

साभारः अखंड ज्योत‌ि (शांत‌िकुंज हर‌िद्वार)

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स, परामनोविज्ञान समाचार, स्वास्थ्य संबंधी योग समाचार, सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed