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तब असली बुद्धिमत्ता का पता चलता हैः दाती जी महाराज

Mon, 04 Feb 2013 01:55 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क। Updated Mon, 04 Feb 2013 01:55 PM IST
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when real intelligence reveals daati ji maharaj pravachan

मित्रो, इस संसार में सभी मनुष्य एक ही प्रकार के नहीं हैं। रंग रूप में भिन्नता तो होती ही है, लोगों के मन भी अलग-अलग प्रकार की चीजों को पसंद करते हैं। किसी को मीठा पसंद है तो किसी को तीता। जिसे जो भी पसंद है, उसकी उपलब्धि होने पर खुशी मनाता है और जो नापसंद है उसे पाने पर ना खुशी जाहिर करता है। इस संसार में हमारे लिए क्या करना उचित है और क्या करना उचित नहीं है, इसके भी अलग-अलग मापदंड बने हुए हैं। उन्हीं मापदंडों के आधार पर समाज के अनेक कायदे-कानून बने हुए हैं।

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इनका पालन करना लोगों के लिए आवश्यक माना गया है। कुछ लोग तो इन कायदों के प्रति इतने सख्त होते हैं कि लोगों को पहले से ही हिदायतें देते रहते हैं कि इन कानून-कायदों का उल्लंघन न हो। आश्चर्य तो तब होता है कि कानून के ये तथाकथित पहरेदार कभी-कभी भविष्य में इन कानूनों के उल्लंघन होने की संभावना पर भी पहले ही लोगों को दण्डित कर देते हैं।
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इस संसार का काम कैसे चलाएं, इसके लिए बहुत कुछ सीखना पड़ता है। लोग पाठशालाओं में बच्चों को पढऩे के लिए भेजते हैं ताकि उनका बौद्धिक विकास हो। स्कूल कालेजों में मनुष्य को शिक्षित किया जाता है, उन्हें बुद्धिमान बनाने का प्रयत्न किया जाता है। लेकिन एक अन्य प्रकार की भी बुद्धिमत्ता होती है जो सांसारिक बुद्धिमत्ता से अलग है।
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भगवान श्री कृष्ण उस बुद्धिमत्ता की ही बात अर्जुन से करते हैं जिसका भगवद् गीता में उल्लेख मिलता है। वे कहते हैं, जब कोई व्यक्ति आभ्यंतरिक दुनिया में अपने मन को उन्मुख करते हुए अग्रसर होता है तब वह अपने निज सत्यस्वरूप से जुड़ जाता और वह अपने आप में स्पष्ट हो जाता है कि वह परमात्मा का ही अंश है। उस स्थिति में पहुंचने पर ही उसे असली बुद्धिमत्ता का पता चलता है कि वास्तव में बुद्धि क्या है।
साभारः परमहंस दाती जी महाराज

दाती जी महाराज परिचय
दाती जी महाराज का जन्म 10 जुलाई 1950 को राजस्थान के पाली जिला में अलावास गांव में हुआ। दाती जी महाराज बचपन से ही तीक्ष्ण बुद्घि के स्वामी थे। बाल्यकाल में ही इनका लगाव ईश्वर से हो गया था। इन्होंने संसार में व्याप्त ज्योतिष, ध्यान और शनि संबंधित भ्रांतियों को दूर करने का विचार किया। इनकी विद्या, ज्ञान और कृपा से बहुत से भक्त लाभ प्राप्त कर रहे हैं। दाती जी के तीन प्रमुख सिद्घांत हैं सेवा, सतसंग और सुमिरन।

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