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सीख: जब भगवान श्रीराम ने ऐसे तोड़ा हनुमानजी का घमंड
Thu, 22 Aug 2019 09:12 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 22 Aug 2019 09:12 AM IST
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हनुमानजी
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माता सीता को जब रावण के चंगुल से छुड़ाने के लिए समुद्र पर सेतु बांधने की तैयारी चल रही थी, तभी भगवान राम को समुद्र सेतु पर शिवलिंग स्थापित करने की इच्छा हुई।उन्होंने हनुमानजी से कहा कि 'मुहुर्त के भीतर काशी जाकर भगवान शंकर से लिंग मांग कर लाओ। हनुमान जी क्षणभर में काशी पहुंच गए। इस पर उन्हें गर्व का अनुभव होने लगा। श्रीराम जी को इस बात का पता लग गया। उन्होंने सुग्रीव को बुलाया और कहा कि मुहुर्त बीतने वाला है, अतएव मैं रेत से बनाकर एक लिंग स्थापित कर देता हूं।
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कुछ ही समय में हनुमान जी भी पहुंच गए। उन्होंने श्रीराम से कहा 'काशी भेजकर मेरे साथ ऐसा क्यों किया?' श्रीराम ने कहा 'मुझसे भूल हुई है। मेरे द्वारा स्थापित इस बालू के लिंग को उखाड़ दो। मैं अभी तुम्हारे लाए लिंग को स्थापित कर देता हूं।' हनुमानजी ने पूंछ में लपेटकर शिवलिंग उखाड़ने का प्रयास किया। शिवलिंग टस से मस नहीं हुआ। हनुमान जी को शक्ति और गति का जो घमण्ड था वह चकनाचूर हो गया। उन्होंने श्रीराम के चरणों में शीश झुका लिया और अपनी नादानी पर क्षमा मांगी।
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