फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Wellness ›   what will you in next birth decide yourself

खुद तय करें कि अगले जन्म में क्या बनेंगे

Mon, 24 Sep 2012 02:10 PM IST
राकेश/इंटरनेट डेस्क
राकेश/इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 24 Sep 2012 02:10 PM IST
विज्ञापन
what will you in next birth decide yourself
अगले जन्म में आप धनवान बनेंगे या गरीब, एक्टर बनेंगे या डॉक्टर यह सब आप पर निर्भर है। हो सकता है कि आप इस पर यकीन न करें लेकिन सच यही है। इसका प्रमाण है श्रीमद्भगवत् गीता। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि आत्मा अमर है। एक शरीर को छोड़कर आत्मा दूसरा शरीर धारण कर लेती है। अर्जुन को समझाते हुए श्री कृष्ण ने कहा है कि ऐसा कोई समय नहीं है जब तुम और मैं नहीं थे। आने वाला ऐसा कोई समय नहीं है जब हम और तुम नहीं होंगे।
विज्ञापन


भगवान प्रत्यक्ष रूप से कहते हैं आत्मा निरंतर एक शरीर से दूसरे शरीर में पहुंचकर अपनी यात्रा जारी रखती है। यानी आप चाहें या न चाहें आपको अगल जन्म लेना है। आपके हाथ में बस इतना है कि आप अगले जन्म में खुद को किस रूप में देखना चाहते हैं यह तय करें। आप कहेंगे कि जब हम खुद ही तय कर सकते हैं कि हमें अगले जन्म में क्या बनना है तो हर व्यक्ति धनवान और सुखी होता है। लेकिन इस दुनियां में गरीब भी हैं और दुःखी भी हैं।
विज्ञापन


श्रीमद्भगवत् गीता में इस प्रश्न का भी उत्तर है। गीता के अष्टम में अध्याय में लिखा है, श्री कृष्ण अर्जुन से कहते है "यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम्। तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद् भावभावितः।।6।।" इसका अर्थ है, "हे कुन्तीपुत्र अर्जुन! यह मनुष्य अन्तकाल में जिस-जिस भी भाव को स्मरण करता हुआ शरीर का त्याग करता है, उस उसको ही प्राप्त होता है, क्योंकि वह सदा उसी भाव से भावित रहा है।"
विज्ञापन
विज्ञापन


यानी आप अंत समय में जिन-जिन चीजों का ध्यान करेंगे अगले जन्म में उन चीजों को प्राप्त करेंगे। इसी मान्यता के कारण बहुत से लोग अपने बच्चों का नाम भगवान के नाम पर अर्थात राम, विष्णु, कृष्ण, गोविंद आदि रखते हैं। इसका उद्देश्य यह रहता है कि जीवन काल में संतान का नाम लेते हुए भगवान का भी स्मरण बना रहे।


आमतौर पर मनुष्य का अपनी संतान से बहुत अधिक मोह रहता है, मरते समय वह अपनी संतान का मुख देना चाहता है और उसे ही याद करता है। संतान का नाम ईश्वर के नाम पर होने से मरते समय संतान को याद करते हुए व्यक्ति ईश्वर का भी ध्यान कर लेता है जिससे मुक्ति मिल जाती है। इसलिए हमेशा उस बात का ध्यान करिये जो आप बनना चाहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स, परामनोविज्ञान समाचार, स्वास्थ्य संबंधी योग समाचार, सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed