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तब नया साल 2015 आपके लिए होगा मंगलमय

प्रणव पंड्या/ अध्यात्मिक गुरु Updated Thu, 01 Jan 2015 03:16 PM IST
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welcome new year 2015
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सन् 2014 विदाई ली और नया वर्ष सन् 2015 आ गया। वैसे नया वर्ष आता है तो लोग उसका स्वागत धूमधाम से करते हैं। कहीं दोस्त लोग मिलकर पार्टिया मनाते हैं तो कहीं नाच तमाशों का आयोजन होता है। कई लोग घरों को सुन्दर ढंग से सजाते हैं तो कुछ आकर्षक परिधानों के साथ बाजार करने या नववर्ष की स्मृति के रूप में कुछ खास खरीददारी करते हैं। कुल मिलाकर नये वर्ष के साथ कुछ न कुछ नया जोश अवश्य देखने को मिलता है।
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पर क्या नये वर्ष का आनन्द कुछ खा-पी लेने और हंस-बोल लेने मात्र से समाप्त हो जाना चाहिए? हर साल होता तो यही सब है, पर इतने तक सीमित होकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि कुछ नया करने का संकल्प भी हमारे अन्दर उभरना चाहिए। नदियां हमेशा आगे की ओर बढ़ती हैं। आग की लपटे हमेशा ऊपर की ओर उठती हैं। सूरज हमेशा प्रकाश बिखेरता है। चन्द्रमा हमेशा शीतलता की वर्षा करता है। ग्रह-नक्षत्र अपनी-अपनी धुरी पर सतत गतिमान रहते हैं।


समय के काँटे हमेशा आगे की ओर बढ़ते चलते हैं। गति के साथ प्रगति नियति का नियम है। फिर हम नये वर्ष में कुछ खा-पीकर कुछ उत्सव मनाकर शान्त क्योंकर रह जाते हैं? हमें भी आगे की ओर बढ़ना चाहिए। नदियों से, अग्रि से, सूरज, चांद और सितारों से और समय से सीख लेकर हमें भी आगे की ओर बढ़ना चाहिए।

अच्छाई देखी और आँखें मूँद लीं तो ऐसा देखना नहीं देखने के बराबर है। अच्छाई देखी और उससे प्रेरणा ली तो ऐसा देखना एक प्रकार सार्थक है। पर अच्छाई से प्रेरणा लेकर उस पर अमल करने लग जाना सही मायने में दर्शन है, देखने की सार्थकता है। नये वर्ष में ऐसी ही कुछ सार्थकता हममें फलीभूत होनी चाहिए।
 
मनुष्य जीवन को देवताओं के लिए भी दुर्लभ कहा गया है। ऐसा अनमोल अवसर पाकर उसका सदुपयोग न कर पाना सचमुच ही हीरों को कौड़ी मोल गंवा देने जैसा है। नये वर्ष के उपलक्ष्य में ऐस कुछ नया करने का संकल्प भी उभरना चाहिए जिससे जीवन की सार्थकता जुड़ी हो।

पानी बहता रहता है तो सड़ता नहीं। जीवन का अर्थ है अविराम गति। जहां जीवन रुक जाता है, समझना चाहिए वहीं से सड़न शुरू हो गयी। कम से कम प्रगति तो रुक ही गयी। कुछ नया किया नहीं गया, सोचा नहीं गया, उद्योग किया नहीं गया तो यह अवस्थिति अधोस्थिति में बदलते देर नहीं लगेगी। क्योंकि समय सदा प्रवहमान है। यहां सब कुछ पल पल आगे बढ़ता जा रहा है।

जो समय के साथ बढ़ चलता है, उसे समय का लाभ अवश्य मिलता है। जो कदम से कदम नहीं मिला पाते, वे अवश्य ही पिछड़े रह जाते हैं। जीवन में कुछ नया पाना हो, तो समय के साथ कदम मिलाकर चलने आना चाहिए। नया वर्ष हमेशा नया उत्साह, नयी उमंग, नया जोश उभारने आता है। उसके आगमन को कुछ होश के साथ लिया जाय और जीवन को हमेशा तरोताजा बनाये रखने की सोची जाय तथा तदनुसार अवलम्बन अमल किया जाय तो अवश्य ही नये साल का स्वागत सार्थक होगा।
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