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एक गांव जहां बच्चा बच्चा बोलता है शुद्ध संस्कृत

Fri, 15 May 2015 01:08 PM IST
Updated Fri, 15 May 2015 01:08 PM IST
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village were people speak in sanskrit

कर्नाटक के शिमोगा शहर से लगभग दस किलोमीटर दूर किमी दूर मुत्तुरु में शायद ही किसी ने आपस में संस्कृत के अलावा किसी और भाषा में बात किया हो। तुंग नदी के किनारे बसे इस गांव में संस्कृत प्राचीन काल से ही बोली जाती है।

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करीब पांच सौ परिवारों वाले इस गांव में प्रवेश करते ही "भवत: नाम किम्?" (आपका नाम क्या है?) पूछा जाता है "हैलो" के स्थान पर "हरि ओम्" और "कैसे हो" के स्थान पर "कथा अस्ति?" सुनकर मन रोमांचित हो जाता है।
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बच्चे, बूढ़े, युवा और महिलाएं- सभी बहुत ही सहज रूप से संस्कृत में बात करते हैं। गांव में रहने वाले मुस्लिम परिवार के लोग भी  संस्कृत उतनी ही सहजता से बोलते हैं जैसे दूसरे लोग।

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संस्कृत में बातें करते हैं ऐसे मौकों पर भी

village were people speak in sanskrit

इस गांव के बच्चे क्रिकेट खेलते हुए और आपस में झगड़ते हुए भी संस्कृत में ही बातें करते हैं। गांव में संस्कृत में बोधवाक्य लिखा नजर आता है। "मार्गे स्वच्छता विराजते। ग्रामे सुजना: विराजते।"

अर्थात् सड़क पर स्वच्छता होने से यह पता चलता है कि गाँव में अच्छे लोग रहते हैं। कुछ घरों में लिखा रहता है कि आप यहां संस्कृत में बात कर कर सकते हैं। इस गांव में बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा संस्कृत में होती है।

बच्चों को छोटे-छोटे गीत संस्कृत में सिखाए जाते हैं। चंदा मामा जैसी छोटी-छोटी कहानियां भी संस्कृत में ही सुनाई जाती हैं।

संस्कृत बोलने वाले इस गांव की और भी है खूबी

village were people speak in sanskrit

बात सिर्फ छोटे बच्चों की ही नहीं है, गांव के उच्च शिक्षा प्राप्त युवक प्रदेश के बड़े शिक्षा संस्थानों व विश्वविद्यालयों में संस्कृत पढ़ा रहे हैं और कुछ साफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में बड़ी कंपनियों में काम कर रहे हैं।

इस गांव के कई युवक व युवतियां आईटी इंजीनियर" हैं और बाहर काम करते हैं। विदेशों से भी अनेक व्यक्ति यहां संस्कृत सीखने आते हैं।

संस्कृत जनभाषा कैसे बनी और अब भी कायम है, यह जानने और इस प्रक्रिया को गति देने के लिए संस्कृत भारती संस्था करीब पैंतीस वर्ष से सक्रिय भी है।

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