Vidur Niti: जीवन का सही प्रबंधन आना है जरूरी, इन बातों का रखें ध्यान
Vidur Niti: विदुर नीति के अनुसार मनुष्य को अपने जीवन जीने की शैली में कुछ नियम अपनाने चाहिए। यदि आपने सही प्रबंधन यानी लाइफ मैनेजमेंट सीख लिया तो आपसे बेहतर व्यक्ति कोई नहीं है।
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Vidur Niti: महात्मा विदुर महाभारत के बुद्धिजीवियों में से एक थे। वे कुशाग्र बुद्धि और दूरदर्शी होने के साथ ही स्वभाव से अत्यंत शांत और सरल थे। यही कारण था कि वे भगवान कृष्ण को भी प्रिय थे। जब कृष्ण जी महाभारत युद्ध से पहले शांति प्रस्ताव लेकर कौरवों के समक्ष गए थे, तब विदुर जी के पास ही ठहरे थे। ये महाराज धृतराष्ट्र और पांडु की तरह ही महर्षि वेदव्यास के पुत्र थे परंतु इनका जन्म दासी के गर्भ से हुआ था, जिसके कारण सभी गुणों से परिपूर्ण होने पर भी ये राजा नहीं बन सके। ये हस्तिनापुर के महामंत्री थे इसलिए महाराज धृतराष्ट्र इनसे महत्वपूर्ण विषयों पर इनसे सलाह लेते थे और हर बात पर खुलकर चर्चा करते थे। विदुर जी और धृतराष्ट्र के मध्य की चर्चा की महत्वपूर्ण बातें विदुर नीति के रूप में जानी जाती हैं। विदुर नीति के अनुसार मनुष्य को अपने जीवन जीने की शैली में कुछ नियम अपनाने चाहिए। यदि आपने सही प्रबंधन यानी लाइफ मैनेजमेंट सीख लिया तो आपसे बेहतर व्यक्ति कोई नहीं है। आइए जानते हैं विदुर नीति के अनुसार क्या हैं वो लाइफ मैनेजमेंट टिप्स
धन का प्रबंधन
विदुर नीति के अनुसार धन का संतुलन बनाने के लिए आय और व्यय सही तरह से किया जाना चाहिए और धन का सोच समझ कर उपयोग करना चाहिए। ऐसा करने से धन की बचत होती है और उसमें वृद्धि भी होती है। धन को सदैव सही और आय बढ़ाने वाले कार्यों में लगाना चाहिए।
आवश्यकता होने पर करें खर्च
आप धन का संचय तभी कर सकते हैं जब मानसिक, शारीरिक एवं वैचारिक संयम रखा जाए। मतलब धन को अपने शौक पूरा करने या बिना आवश्यकता के भौतिक सुखों की पूर्ति के लिए धन को बर्बाद न करें। धन जरूरत पड़ने पर ही खर्च करना चाहिए।
दान करना जरूरी
विदुर नीति के अनुसार अगर व्यक्ति के पास धन प्रचुर मात्रा में है तो उसे दान अवश्य करना चाहिए। यह जीवन का सबसे बड़ा पुण्य होता है। दान करने वाले व्यक्ति का मान-सम्मान बढ़ता है। धन को बढ़ाने के लिए दान करना भी आवश्यक है।
धन का प्रयोग बुद्धिमानी से करें
जो व्यक्ति न तो धन का सही तरह से भोग करता है, और न ही उसका दान करता है, तो ऐसे धन का नाश होना निश्चित होता है। इसलिए धन का दान करना और उसे बुद्धिपूर्वक उपभोग करना आवश्यक होता है। एक जगह रुका हुआ धन बढ़ता नहीं है इसलिए सोच समझकर निवेश करना चाहिए।