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Tulsidas Jayanti 2021: जानिए कैसे पत्नी की फटकार से तुलसीदास जी बने श्रीराम के अनन्य भक्त
Sun, 15 Aug 2021 06:35 AM IST
विनोद शुक्ला
अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 15 Aug 2021 06:35 AM IST
सार
महान ग्रंथ श्रीरामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने कुल 12 ग्रंथों की रचना की। सबसे अधिक ख्याति उनके द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस को मिली,ये उन्होंने सरल अवधि भाषा में लिखी। श्रीरामचरितमानस के बाद हनुमान चालीसा उनकी लोकप्रिय रचना है।
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Tulsidas Jayanti 2021: तुलसीदासजी का जन्म संवत 1589 को उत्तर प्रदेश के बांदा जिला के राजापुर नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम आत्माराम दुबे तथा माता का नाम हुलसी था।
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विस्तार
पूरे देश में संत गोस्वामी तुलसीदासजी की याद में श्रावण मास की सप्तमी के दिन तुलसीदास जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष यह 15 अगस्त, रविवार के दिन मनाई जाएगी। गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के महान संत कवि थे, जिन्हें आदि काव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का अवतार भी माना जाता है। इन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती के मार्गदर्शन से अपने जीवन में सगुण रामभक्ति की धारा को ऐसा प्रवाहित किया कि वह धारा आज भी प्रवाहित हो रही है। रामभक्ति के द्वारा न केवल अपना ही जीवन कृतार्थ किया अपितु जन-जन को श्रीराम के आदर्शों से बांधने का प्रयास किया।
तुलसीदासजी का परिचय
तुलसीदासजी का जन्म संवत 1589 को उत्तर प्रदेश के बांदा जिला के राजापुर नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम आत्माराम दुबे तथा माता का नाम हुलसी था। अध्यात्म के मार्गदर्शक तुलसीदास के बारे में वर्णित है कि वह जन्म के समय रोए नहीं बल्कि उन्होंने ‘राम’नाम का उच्चारण किया था, इस कारण इनका बचपन का नाम रामबोला रखा गया था। जन्म से जुड़ी एक और चमत्कारिक बात कही जाती है कि उनके मुख में 32 दांत थे। तुलसीदास जी ने अपने बाल्यकाल में अनेक दुख सहे युवा होने पर इनका विवाह रत्नावली से हुआ, अपनी पत्नी रत्नावली से इन्हें अत्याधिक प्रेम था परंतु अपने इसी प्रेम के कारण उन्हें एक बार अपनी पत्नी रत्नावली की फटकार " लाज न आई आपको दौरे आएहु नाथ" अस्थि चर्म मय देह यह, ता सों ऐसी प्रीति ता। नेकु जो होती राम से, तो काहे भव-भीत बीता।। ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी और तुलसी श्रीरामजी की भक्ति में ऐसे डूबे कि उनके अनन्य भक्त बन गए। बाद में इन्होंने गुरु बाबा नरहरिदास से दीक्षा प्राप्त की एवं उन्होंने ही इनका नाम तुलसी रखा था ।तुलसीदास जी का अधिकांश जीवन चित्रकूट, काशी और अयोध्या में व्यतीत हुआ। तुलसी दास जी अनेक स्थानों पर भ्रमण करते हुए राम कथा का प्रचार-प्रसार करते रहे।
तुलसीदास जी की मुख्य रचनाएं
महान ग्रंथ श्रीरामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने कुल 12 ग्रंथों की रचना की। सबसे अधिक ख्याति उनके द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस को मिली,ये उन्होंने सरल अवधि भाषा में लिखी। श्रीरामचरितमानस के बाद हनुमान चालीसा उनकी लोकप्रिय रचना है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित ग्रंथों में श्रीरामचरितमानस, कवितावली, जानकीमंगल, विनयपत्रिका, गीतावली, हनुमान चालीसा, बरवै रामायण इत्यादि प्रमुख हैं। रामचरितमानस जिसमें तुलसीदास जी ने भगवान राम के चरित्र का अत्यंत मनोहर एवं भक्तिपूर्ण चित्रण किया है। उनको हनुमानजी के माध्यम से कई बार प्रभु श्री राम के साक्षात दर्शन हुए। उन्होंने अपना अंतिम समय काशी में व्यतीत किया और प्रभु श्रीराम का स्मरण करते हुए अपने शरीर का त्याग किया एवं उनकी आत्मा प्रभु श्री राम में विलीन हो गई।
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तुलसीदासजी का परिचय
तुलसीदासजी का जन्म संवत 1589 को उत्तर प्रदेश के बांदा जिला के राजापुर नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम आत्माराम दुबे तथा माता का नाम हुलसी था। अध्यात्म के मार्गदर्शक तुलसीदास के बारे में वर्णित है कि वह जन्म के समय रोए नहीं बल्कि उन्होंने ‘राम’नाम का उच्चारण किया था, इस कारण इनका बचपन का नाम रामबोला रखा गया था। जन्म से जुड़ी एक और चमत्कारिक बात कही जाती है कि उनके मुख में 32 दांत थे। तुलसीदास जी ने अपने बाल्यकाल में अनेक दुख सहे युवा होने पर इनका विवाह रत्नावली से हुआ, अपनी पत्नी रत्नावली से इन्हें अत्याधिक प्रेम था परंतु अपने इसी प्रेम के कारण उन्हें एक बार अपनी पत्नी रत्नावली की फटकार " लाज न आई आपको दौरे आएहु नाथ" अस्थि चर्म मय देह यह, ता सों ऐसी प्रीति ता। नेकु जो होती राम से, तो काहे भव-भीत बीता।। ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी और तुलसी श्रीरामजी की भक्ति में ऐसे डूबे कि उनके अनन्य भक्त बन गए। बाद में इन्होंने गुरु बाबा नरहरिदास से दीक्षा प्राप्त की एवं उन्होंने ही इनका नाम तुलसी रखा था ।तुलसीदास जी का अधिकांश जीवन चित्रकूट, काशी और अयोध्या में व्यतीत हुआ। तुलसी दास जी अनेक स्थानों पर भ्रमण करते हुए राम कथा का प्रचार-प्रसार करते रहे।
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तुलसीदास जी की मुख्य रचनाएं
महान ग्रंथ श्रीरामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने कुल 12 ग्रंथों की रचना की। सबसे अधिक ख्याति उनके द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस को मिली,ये उन्होंने सरल अवधि भाषा में लिखी। श्रीरामचरितमानस के बाद हनुमान चालीसा उनकी लोकप्रिय रचना है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित ग्रंथों में श्रीरामचरितमानस, कवितावली, जानकीमंगल, विनयपत्रिका, गीतावली, हनुमान चालीसा, बरवै रामायण इत्यादि प्रमुख हैं। रामचरितमानस जिसमें तुलसीदास जी ने भगवान राम के चरित्र का अत्यंत मनोहर एवं भक्तिपूर्ण चित्रण किया है। उनको हनुमानजी के माध्यम से कई बार प्रभु श्री राम के साक्षात दर्शन हुए। उन्होंने अपना अंतिम समय काशी में व्यतीत किया और प्रभु श्रीराम का स्मरण करते हुए अपने शरीर का त्याग किया एवं उनकी आत्मा प्रभु श्री राम में विलीन हो गई।
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