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दीपावली पर करें सुखमय वर्ष बिताने के उपाय: आशाराम बापू

Tue, 13 Nov 2012 09:56 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क। Updated Tue, 13 Nov 2012 09:56 AM IST
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tips by aasharam bapu on how to make year ahead happy and prosperous
दीपावली वर्ष का आखिरी दिन और कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा वर्ष का प्रथम दिन है (गुजराती विक्रम संवत् अनुसार) । यह दिन आपके जीवन की डायरी का पन्ना बदलने का दिन है। आज के दिन भगवान नारायण ने वामन रूप लेकर राजा बलि से उनका सर्वस्व ले लिया था। बलि ने भी जिसका सर्वस्व है उस सर्वेश्वर को अपना सब कुछ अर्पित करके रिझा लिया।
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‘महाभारत’ में पितामह भीष्म कहते हैं : ‘युधिष्ठिर ! आज नूतन वर्ष के प्रथम दिन जो मनुष्य हर्ष में रहता है, उसका पूरा वर्ष हर्ष में जाता है और जो शोक में रहता है, उसका पूरा वर्ष शोक में ही व्यतीत होता है।’ नूतन वर्ष के दिन आप पक्का इरादा कर लो कि हमें इसी जन्म में परमात्म-सुख पाना है, परमात्म-ज्ञान पाना है, परमात्म-आनंद पाना है, परमात्म-माधुर्य पाना है। ऐसा अपना साफ हौसला कर लो।
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दूसरा आप विकारी सुखों में गिरो नहीं, परमात्मा का आनंद उभारो। फिर दुनिया का कोई भी सुख आपको फंसायेगा नहीं और कोई भी दुःख आपको दबायेगा नहीं। तीसरी बात है कि आप अपने जीवन में ज्ञान के दीये जलाओ। दुःख आये तो दुःख के भोगी मत बनो, सुख आये तो सुख के भोगी मत बनो। सुख और दुःख दोनों को साधन मानकर उनका सदुपयोग करो, उनसे पार ले जानेवाली प्रज्ञा को विकसित करो। भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं :
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आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योऽर्जुन ।
सुखं वा यदि वा दुःखं स योगी परमो मतः ॥
‘हे अर्जुन ! जो योगी अपनी भाँति सम्पूर्ण भूतों में सम देखता है और सुख अथवा दुःख को भी सबमें सम देखता है, वह योगी परम श्रेष्ठ माना गया है ।’
सुख आ जाय चाहे दुःख आ जाय, योगी परम मतिवाला होता है। सुख-दुःख को देखनेवाली मति के धनी बन जाओ... ज्ञान के प्रकाशक! चौथी बात आप प्रसन्न रहो, दूसरों की प्रसन्नता में मदद करो। प्रसन्न रहने के लिए सुबह के शुद्ध हवाओं में खूब गहरा श्वास लो। ‘ॐ शांति, ॐ आनंद’ का मानसिक जप किया करो, फिर फूँक मारते हुए चिंता को, हाई बी.पी., लो बी.पी. आदि के रोगों, तनावों को बाहर छोड़ दो। फिर खूब गहरा श्वास लो और फिर जोर से फूँक मार दो। ऐसे 25 बार फूँक मार के रोग, भय, चिंता, बीमारियों को भगा दो।

ज्ञान के प्रकाश में जियो। जैसे घर की साफ-सफाई करते हो, ऐसे ही उद्देश्य की साफ-सफाई करना, जैसे घर में नयी चीज लाते हो, ऐसे ही अपने जीवन में नया नजरिया लाना, दिये जलाना तो ज्ञान-प्रकाश में जीना। यस्य ज्ञानमयं तपः... ज्ञानमय तप में जियो। हजारों मंदिरों, मसजिदों, चर्चों में, इधर-उधर जाओ फिर भी हृदय-मंदिर में ज्ञान के दीये जलाये बिना छुटकारा नहीं है, कल्याण नहीं है।

पहले के जमाने में गाँवों में दीपावली के दिनों में वर्ष के प्रथम दिन नीम और अशोक वृक्ष के पत्तों के तोरण (बंदनवार) बाँधते थे, जिससे कि वहाँ से लोग गुजरें तो वर्ष भर प्रसन्न रहें, निरोग रहें। अशोक और नीम के पत्तों में रोगप्रतिकारक शक्ति होती है। उस तोरण के नीचे से गुजरकर जाने से वर्षभर रोगप्रतिकारक शक्ति बनी रहती है। वर्ष के प्रथम दिन आप भी अपने घरों में तोरण बाँधो तो अच्छा है।


आप स्वस्थ रहो, सुखी रहो, सम्मानित रहो और जीवन की शाम होने के पहले जीवनदाता के आनंद को प्रकट करो। जीवनदाता के गुण को, स्वभाव को जानकर आप एकदम स्वस्थ हो जाओ, ‘स्व’ में स्थित हो जाओ।

संत श्री आशारामजी बापू परिचय

संत श्री आशारामजी बापूजी न केवल भारत को अपितु सम्पूर्ण विश्व को अपनी अमृतमयी वाणी से तृप्त कर रहे हैं। संत श्री आसारामजी बापू का जन्म सिंध प्रान्त के नवाबशाह ज़िले में बेराणी गाँव में नगर सेठ श्री थाऊमलजी सिरुमलानी के घर 17 अप्रैल 1941 को हुआ। देश-विदेश में इनके 410 से भी अधिक आश्रम व 1400 से भी अधिक श्री योग वेदांत सेवा समितियाँ लोक-कल्याण के सेवाकार्यों में संलग्न हैं।

गरीब-पिछड़ों के लिए ‘भजन करो, भोजन करो, रोजी पाओ’ जैसी योजनाएं, निःशुल्क चिकित्सा शिविर, गौशालाएं, निःशुल्क सत्साहित्य वितरण, नशामुक्ति अभियान आदि सत्प्रवृत्तियां भी आश्रम व समितियों द्वारा चलायी जाती है। आशा राम बापू जी भक्तियोग, कर्मयोग व ज्ञानयोग की शिक्षा से  सभी को स्वधर्म में रहते हुए सर्वांगीण विकास की कला सिखाते हैं। 
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