इस एक व्रत से कम हो जाता है साढ़ेसाती का प्रभाव, हर हफ्ते करने से मिलेगा दुगना पुण्य
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शनि की साढ़ेसाती का नाम सुनते ही लोगों में एक डर दिखने लग जाता है और डर दिखे भी क्यों ना। साढ़ेसाती मतलब साढ़े सात साल व्यक्ति को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। किसी पर साढ़ेसाती लगने के बाद आर्थिक परेशानी से लेकर शारीरिक परेशानी, बनते कामों का बिगड़ना, पूरे कर्ज में डूब जाना जैसी कई परेशानियां एक के बाद एक आने लगती है।
हालांकि साढ़ेसाती में गिनती के कुछ ऐसे भी लोग होते है, जिन्हें इसमें शुभ फल मिलता है। वैसे अधिकतर मामलों में साढ़ेसाती हमेशा ही अशुभ फल देता है। हालांकि साढ़ेसाती के प्रभाव को कम करने के लिए कुछ उपाय भी है जिसे सूर्यव्रत को अहम माना जाता है।
- किसी भी रविवार को सूर्यव्रत का प्रारम्भ किया जा सकता है, लेकिन ध्यान रखें जिस रविवार को इस व्रत को शुरू करें उससे पहले वाले दिन शनिवार को दो नागबेल के पत्ते, सुपारी, लाल फूल, और तांबे का पैसा लेकर हनुमान जी के मंदिर में जाकर उन्हें अर्पित करें। सूर्यव्रत को 121 रविवार करना होता है।
- हर रविवार को नहाकर सूर्य प्रतिमा का पूजा करें और अनार का भोग लगाएं। अनार ना होने की स्थिति में घी, शक्कर का भी भोग लगा सकते हैं।
- व्रत वाले दिन दो नागबेली के पान, एक सुपारी, 33 रुपये दक्षिणा और कुछ लाल रंग के फल का दान किसी ब्राह्मण को करें। रविवार को पूरे दिन का उपवास रखें और रात में ही खाना खाएं।
- 121 रविवार पूरे होने पर 122वें रविवार को इस व्रत का उद्यापन करें और ब्राह्मण को भोजन कराएं।
- इस व्रत को करने से नौकरी में चल रही कठिनाई दूर होती है। विवाह में आ रही बाधा, बीमारी आदि दूर हो जाते हैं।