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तीसरी भूल, जब उस युवती ने कह दिया 'कपड़ों को क्यों देखते हो'
सुधांशु जी महाराज/अध्यात्मिक गुरु
Updated Tue, 13 May 2014 08:45 AM IST
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मानव जीवन घटनाओं की एक अद्भुत घाटी है। जीवनयात्रा में अनेक घटनाएं घटती हैं, घटनाओं का प्रवाह इंसान को जगाने के लिए आता है, झकझोरने के लिए आता है। जीवन में घटने वाली छोटी-छोटी घटनाएं इतनी प्रेरणादायक होती हैं कि व्यक्ति का जीवन बदल जाता है। संवेदनशील व्यक्ति बहुत बार स्वयं से ही लज्जित हो जाता है और अपने आप से लज्जित होना अच्छी बात होती है।
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एक यहूदी फकीर हुसैन साहिब हुए हैं-उन्होंने कहा मैं अपनी जिन्दगी में तीन बार बड़ा शर्मिन्दा हुआ। वह कहते हैं मैंने एक बार एक व्यक्ति को देखा जो शराब पिए हुआ था, उसको कीचड़ में फिसलते हुए, गिरते हुए संभलने की कोशिश करते मैंने देखा, यह देखते ही मैंने उसे आवाज दी, सम्भल भाई! नशे में हो। अगर गिर जाओगे तो उठना मुश्किल हो जाएगा।
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इतना सुनते ही वह शराबी व्यक्ति मेरी तरफ देखकर बोला, मैं तो नशे में पागल हूं, कीचड़ में गिर जाउंगा तो कपड़ों में लगा हुआ कीचड़ तो धोकर ठीक हो जाएगा, लेकिन तुम तो धर्मिक इंसान हो, ईश्वर के नेक बन्दे हो, तुम न गिर जाना, अगर तुम गिर गए तो तुम्हारा मन स्वच्छ होने वाला नहीं। क्योंकि मन पर लगा कीचड़ कभी साफ नहीं हो पाएगा। हुसैन साहिब कहते हैं कि उस समय मुझे बहुत शर्मिन्दगी हुई कि एक शराब के नशे में बेहोश आदमी जो कह गया, वह होश वाला भी नहीं कह सकता।
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फकीर आगे कहते हैं कि दूसरी बार मैं एक बच्चे को देखकर लज्जित हुआ। वह बच्चा हाथ में जलता हुआ दीपक लेकर आ रहा था, मैंने उससे पूछा कि इस दीये में प्रकाश कहां से आया है? मेरे इतना कहते ही एक हवा का तेज झोंका आया और दीपक बुझ गया। बच्चे ने उत्तर दिया कि यह बाद में पूछना कि प्रकाश कहां से आया, पहले आप यह बताओ कि प्रकाश गया कहां? तो फिर मैं आपको बताऊं कि प्रकाश आया कहां से था। बच्चे का उत्तर सुनकर हुसैन साहिब लज्जित होकर सोचेन लगे कि कहां से आता है प्रकाश और कहां समाहित हो जाता है?
हुसैन कहते हैं कि जीवन में मुझे तीसरी बार शर्मिन्दगी उस समय हुई जब एक युवति ने मेरे पास आकर कहा कि मेरा पति निर्मोही है, घर-गृहस्थी पर बिल्कुल ध्यान नहीं देता। मैंने उस महिला को डांटते हुए कहा, पहले अपना आंचल तो ठीक कर, बाद में पति के लिए शिकायत करना। यह सुनकर वह महिला बोली, मैं तो अपने पति के लिए पागल हूं, मुझे तो अपना होश नहीं, लेकिन तू तो अपने मालिक के प्यार में पागल है, तब भी तुझे दूसरों के कपड़ों का ही ध्यान आता है।
अगर तू सच में मालिक का प्यारा है तो देख सारी दुनिया में सर्वत्र तुझे प्यार करने वाला तेरा परमात्मा तेरे सामने है, तू उसका ध्यान कर। हुसैन साहिब कहते हैं कि मैं उसकी इस बात से बहुत शर्मिन्दा हुआ।