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सफलता पाना चाहते हैं तो परिणाम की चिंता छोड़िये
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
Updated Tue, 18 Dec 2012 02:38 PM IST
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भगवान श्री कृष्ण ने गीता
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में अर्जुन के माध्यम से मनुष्य को समझाया है कि मनुष्य के वश में सिर्फ कर्म करना
है। जब हम फल की चिंता करने लगते हैं, तो कर्म भी सही से पूरा नहीं कर पाते हैं
जिससे फल प्रभावित होता है। परिणाम यह होता है कि हम अपने लक्ष्य से चूक जाते हैं
और कहने लगते हैं किस्मत साथ नहीं दे रही। जबकि, गलती सिर्फ हमारी यह होती है कि हम
कर्म पर ध्यान नहीं देते और परिणाम के फेर में उलझे रहते हैं।
महाभारत का एक प्रसंग इस संदर्भ में उल्लेखनीय है। अभिमन्यु की वीरगति का समाचार सुनकर अर्जुन बहुत दुःखी हो जाते हैं। उन्हें पता चलता है कि जयद्रथ के कारण ही अभिमन्यु को वीरगति प्राप्त हुई है। अर्जुन प्रतिज्ञा लेते हैं कि अगले दिन का सूर्यास्त जयद्रथ नहीं देखेगा। अगर जयद्रथ को नहीं मार पाया तो अग्नि समाधि ले लूंगा।
अगले दिन जब युद्ध आरंभ हुआ तो अर्जुन और जयद्रथ के बीच संग्राम शुरू हो गया। कौरवों की सेना जयद्रथ को बचाने में लगी थी। इससे अर्जुन को जयद्रथ से युद्ध करने में परेशानी आ रही थी। इधर दिन निकला जा रहा था। अर्जुन बार-बार सूर्य को देखते थे कि, कहीं सूर्यास्त न हो जाए। अर्जुन की मनोदशा को समझते हुए श्री कृष्ण ने समझाया कि परिणाम का विचार करके युद्ध करोगे तो जयद्रथ को मारने में असफल रहोगे। तुम अपना काम करो अर्थात युद्ध करो और सूर्य को अपना काम करने दो।
अर्जुन, श्री कृष्ण की बातों का मर्म समझकर युद्ध करने लगे और अंततः सूर्यास्त से पहले अर्जुन जयद्रथ का वध करने में सफल हुए। गीता में कर्म फल के विषय में भगवान ने कहा है कि कर्म का परिणाम निश्चित है। इसलिए परिणाम का विचार त्याग कर सदैव कर्म करते रहना चाहिए। कर्म अगर सकारात्मक होगा तो परिणाम भी सकारात्मक और अनुकूल प्राप्त होगा। नकारात्मक कर्म का परिणाम भी उसी अनुकूल तय समझना चाहिए।
महाभारत का एक प्रसंग इस संदर्भ में उल्लेखनीय है। अभिमन्यु की वीरगति का समाचार सुनकर अर्जुन बहुत दुःखी हो जाते हैं। उन्हें पता चलता है कि जयद्रथ के कारण ही अभिमन्यु को वीरगति प्राप्त हुई है। अर्जुन प्रतिज्ञा लेते हैं कि अगले दिन का सूर्यास्त जयद्रथ नहीं देखेगा। अगर जयद्रथ को नहीं मार पाया तो अग्नि समाधि ले लूंगा।
अगले दिन जब युद्ध आरंभ हुआ तो अर्जुन और जयद्रथ के बीच संग्राम शुरू हो गया। कौरवों की सेना जयद्रथ को बचाने में लगी थी। इससे अर्जुन को जयद्रथ से युद्ध करने में परेशानी आ रही थी। इधर दिन निकला जा रहा था। अर्जुन बार-बार सूर्य को देखते थे कि, कहीं सूर्यास्त न हो जाए। अर्जुन की मनोदशा को समझते हुए श्री कृष्ण ने समझाया कि परिणाम का विचार करके युद्ध करोगे तो जयद्रथ को मारने में असफल रहोगे। तुम अपना काम करो अर्थात युद्ध करो और सूर्य को अपना काम करने दो।
अर्जुन, श्री कृष्ण की बातों का मर्म समझकर युद्ध करने लगे और अंततः सूर्यास्त से पहले अर्जुन जयद्रथ का वध करने में सफल हुए। गीता में कर्म फल के विषय में भगवान ने कहा है कि कर्म का परिणाम निश्चित है। इसलिए परिणाम का विचार त्याग कर सदैव कर्म करते रहना चाहिए। कर्म अगर सकारात्मक होगा तो परिणाम भी सकारात्मक और अनुकूल प्राप्त होगा। नकारात्मक कर्म का परिणाम भी उसी अनुकूल तय समझना चाहिए।