एक ऐसी सॉफ्टवेयर इंजीनियर जिसे कंपनी में अपनी प्रतिभा, धैर्य और सूझ-बूझ का लाभ मिला

संपादकीय डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 24 Feb 2018 03:14 PM IST
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रिया और सिडनी एक बड़ी आईटी कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर कार्यरत थीं। दोनों कॉलेज के समय से एक दूसरे को जानती थीं। हालांकि दोनों के प्रोजेक्ट अलग-अलग थे, लेकिन ऑफिस में दोनों की सीटें आसपास ही थीं। रिया एक बड़ी एयरलाइन कंपनी के लिए एक बहुत बड़ा कोड बना रही थी। 
वह पिछले कई महीनों से इस कोड पर काम कर रही थी। कोड बनकर तैयार था, लेकिन न जाने क्यों, एक जगह पर आकर बार-बार अटक जाता था। रिया ने सारे तरीके आजमा कर देख लिए, लेकिन कोई हल नहीं निकल पा रहा था। सिडनी बार-बार रिया को प्रोत्साहित करती रहती थी। लेकिन उसे कोई सफलता नहीं प्राप्त हो रही थी। 

रिया की पूरी टीम अपना गुस्सा रिया पर निकाल रही थी। इसी बीच रिया को एक दूसरी कंपनी से नौकरी का ऑफर आया। रिया का दिल कह रहा था कि सब कुछ छोड़कर वह दूसरी कंपनी में चली जाए। 

वहां उसे बेहतर वेतन और बेहतर ओहदा, सब मिलेगा। लेकिन सिडनी ने रिया को समझाया कि अगर वह काम अधूरा छोड़कर जाएगी, तो कोई और उस काम को पूरा नहीं कर पाएगा, क्योंकि पूरा कोड रिया ने ही लिखा है। और फिर रिया की सारी मेहनत व्यर्थ हो जाएगी। सिडनी के कहने पर रिया ने एक बार फिर से कोशिश की। 

लेकिन उसी दिन रिया की उसकी टीम के एक सदस्य से बहस हो गई, और वह कंपनी छोड़कर चली गई। रिया के बाद वह काम सिडनी को मिल गया, क्योंकि सिडनी उस कोड के बारे में थोड़ा बहुत जानती थी, जो उसे रिया ने बताया था। 

सिडनी ने दो दिन में उस कोड की सारी गड़बड़ियां ठीक कर दीं और वह कोड चलने लगा। वह कोड कंपनी के सबसे अच्छे बने कोड में से माना जाने लगा। चूंकि वह प्रोजेक्ट कंपनी के लिए बहुत महत्व रखता था, इसलिए उसे कोड करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर सिडनी को प्रमोशन मिला और उसका वेतन बीस प्रतिशत बढ़ा दिया गया।

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