हमारे प्रयासों से नक्सली मामलों में कमी आई हैः श्री श्री रविशंकर
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आर्ट ऑफ लिविंग के माध्यम में दुनिया में शांति के लिए प्रयास करने वाले श्री श्री रविशंकर को हाल ही में कोलंबिया में विद्रोहियों को एक तरफा युद्ध विराम के लिए मनाने में बड़ी कामयाबी मिली है जिससे करीब आधी सदी से चल रहे सरकार और विद्रोहियों का सशस्त्र संघर्ष समाप्त हो गया है और कोलंबिया में शांति व्यवस्था बहाल हुई है।
इन्होंने कोलंबिया के अलावा दुनिया के कई दूसरे देशों में भी सराहनीय प्रयास किए हैं। विश्व शांति दिवस के मौके पर अमर उजाला ने जब इनसे बात करते हुए पूछा कि आप भारत में नक्सली मामलों के लिए क्या कर रहे हैं तो इन्होंने क्या कहा जरा खुद ही देख लीजिए।
इस तरह हुई कोलंबिया में श्री श्री की विद्रोहियों से मुलाकात
प्रश्न-1आपके मन में कोलंबिया में शांति स्थापना के लिए विद्रोह गुट से बात करने का ख्याल कैसे आया? क्या कोई ऐसी घटना है जिसने आपको इसके लिए प्रेरित किया?
श्री श्री रविशंकर- कोलंबिया से कई लोग हमारे पास आते रहे, वहां हमारा केन्द्र भी चलता रहा है। वहां के लोगों से बातचीत होती रही, वे लोग बताते रहे कि वहां कितना विद्रोह हो रहा है और कितना जानमाल का नुकसान हो रहा है। बीस लाख लोग मारे जा चुके है और सत्तर लाख लोग बेघर हो चुके हैं।
यह सब जब मैंने सुना तो कहा कि किसी भी तरह से कोई रास्ता जरूर निकालना होगा और वहां के विद्रोही, उग्रवादी लोगों से बातचीत का प्रयास आर्ट ऑफ लीविंग के शिक्षकों ने किया और उन्हे सफलता मिली। मुझे भी उनसे मिलने का मौका मिला। मिलने के परिणाम सुखद रहे।
कौन सा मंत्र दिया विद्रोहियों को
प्रश्न-2 जिस शांति प्रयास में अमेरिका, नार्वे और यूरोपीय संघ असफल रहे उसमें आपको सफलता मिली। आखिर आपने कोलंबिया के रिवोल्यूशनरी आर्मड फोर्सेज को ऐसा कौन सा मंत्र दिया जिससे वर्षो से हथियार उठाने वाले शांति वार्ता के लिए आगे बढे?
श्री श्री -देखिए, मुख्य बात यह है कि जहां विष्वास नहीं है वहां संपर्क टूट जाता है और संपर्क साधने के लिए विष्वास जताना अनिवार्य प्रक्रिया है। वहां के लोग जानते थे कि हमारा कोई भी राजनैतिक उदे्श्य नहीं है और हम तटस्थ हैं तथा शांति प्रिय लोग हैं तो उन्हे लगा कि उनके मन की बात समझी जा रही है और इनसे बातचीत करना चाहिए।
इसतरह से उनकी सोच में एक परिवर्तन आया। उनसे बातचीत के तीन दिवसीय प्रयास में पहले और आखिरी दिन तो जो उनका रूख था वह सराहनीय है और मैं उन्हें बधाई देता हूं कि उन्होंने हमारी बात खुले दिल से सुनी और मानी।
इसलिए विद्रोहियों को मनाने में सफलता मिली
प्रश्न-3 कोलंबिया सरकार की ओर से आपको शांति प्रयास में किस प्रकार का योगदान मिला? क्या इसके लिए आपको सरकार की ओर मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए संपर्क किया गया?
श्री श्री -देखिये हम यदि सरकार की ओर से जाते तो शायद यह कार्य नहीं हो पाता। हम एक स्वतंत्र व्यक्ति के रूप में गए और लोगों से बातचीत की, इसमें हमे सफलता मिली। इस सफलता पर कोलंबिया सरकार भी संतुष्ट थी।
ईराक और अफगानिस्तान में शांति प्रयास कैसा रहा
प्रश्न-4 कोलंबिया के अलावा आपने ईराक और अफगानिस्तान में भी काफी काम किया है और युद्ध पीडि़तों को आर्ट ऑफ लीविंग के जरिए आपने बहुत मदद की है। उन देशों की सरकारों का रवैया कैसा रहा और लोगों ने क्या प्रतिक्रिया दी?
श्री श्री -सरकारों का रवैया हमेशा से बहुत अच्छा रहा है। कौन सरकार नहीं चाहेगी कि उनके वहां शंति और सौहार्द बढे। बल्कि सभी लोग यही चाहते हैं। इराक में भी सरकार की तरफ से सहयोग मिला। वहां पहले तो वीजा नहीं देते थे, फिर वीजा देना प्रारंभ किया। एक कार्यक्रम इराक ने सरकारी स्तर पर किया जिसमे उन्होंने अपने सांसदों को एक जगह बुलवाकर समझाने की बात कही।
सांसदों ने सीखा कि शांति के मिशन को आगे कैसे बढाना है और राहत के कार्य कैसे चलाए जाएं। इससे हमें भी बहुत खुशी हुई। और असका बेहद सुखद परिणाम यह आया कि वहां आयुर्वेद का पहला अस्पताल भी खुला।
आईएस की धमकी पर क्या बोले श्री श्री रविशंकर
प्रश्न-5 इस्लामाबाद में आर्ट ऑफ लिविंग के केन्द्र को आग के हवाले कर दिया था। तालिबान और आईएस की और से जान से मारने की धमकी भी मिली है। इसे आप कितनी बड़ी चुनौती मानते है?
श्री श्री -देखिए जब भी कोई महत्वपूर्ण कार्य होता है तो कुछ उपद्रवी भी पनपते है और कुछ अपनी नाराजगी भी जताते है क्योंकि, उन्हे शांति नहीं चाहिये होती है उन्हे हमेशा विवाद, झमेले ही पसंद होते हैं तो ऐसे लोग ऐतराज करेंगे ही। लेकिन इनका हमारे ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
नक्सलवाद पर श्री श्री रविशंकर का यह है कहना
प्रश्न-6 भारत में नक्सलवाद एक जटिल समस्या है। सरकार इसे सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी समस्या मानती है। लेकिन सच यह है कि कुछ खास हो नही रहा है और अंततः आदिवासी सरकार और नक्सलियों की लड़ाई में पिस रहे है। क्या आप नक्सलियों से भी बातचीत की कोई पहल करेगें जिससे भारत के जंगलो में भी शांति की स्थापना हो सके?
श्री श्री -देखिए इस पर हमारा निरंतर कार्य चल रहा है। यह एक कठिन और दीर्घकालीन कार्य है। जैसे झारखंड में हमने बहुत पहल की और कई लोगों को ‘‘बुलेट टू बैलेट’’ के माध्यम से मुख्य धारा में लाया गया है। ऐसे ही छत्तीसगढ़ में भी कार्य प्रगति पर है लेकिन वहां की समस्या थोडी जटिल है। बिहार को ले लीजिए वहां बहुत नरसंहार होते थे।
जैसे जहानाबाद और अन्य जिलों में 2001 से आर्ट ऑफ लीविंग का कार्य चल रहा है और इससे वहां बहुत बडा परिवर्तन आया है। बिहार में जाति को लेकर संहार हुआ करते थे वे आजकल सुनाई नहीं देते हैं। यहां पर जमीनी स्तर पर लोगों ने बहुत कार्य किया है और मैं उन्हे बहुत बधाई देना चाहूंगा कि उन्होंने जो शांति और अपनेपन की लहर वहां चलाई है उसी से यह बदलाव आया है। पहले तो इसमे केन्द्र सरकार हमे बिल्कुल मदद नहीं कर रही थी।
जब चिदम्बरम जी गृह मंत्री थे, उनसे हमने कई बार अनुरोध किया मगर उनका इस मुद्दे पर बिल्कुल भी सहयोग नहीं मिला। मध्य और पूर्वोत्तर भारत में जो नक्सलवाद और उग्रवाद की समस्या है उसमें गैर सरकारी संगठन मिलकर मध्यस्थता की भूमिका अदा कर देष के उज्जवल भविष्य की कल्पना को साकार कर सकते हैं।