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गरीब हो या अमीर दान से जुड़ी यह बातें हर किसी को जानना चाहिए

Sat, 27 Jun 2015 01:07 PM IST
Updated Sat, 27 Jun 2015 01:07 PM IST
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sprituality daan and dharm

दान का सीधा सा अर्थ है देना। लेकिन इसका जिक्र जब भी किसी सराहनीय और अवश्य किए जाने लायक काम के तौर पर किया जाता है तो  उसका अर्थ है किसी की सेवा सहायता के लिए कुछ देना।

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उस तरह देना कि किया गया अवदान जिसे दिया गया है, उसे किसी न किसी तरह समृद्ध और समर्थ बनाता हो। देने का यह भाव खुद की दुनिया का फैलाव करता है। अपना दायरा उन लोगों तक फैला देता है जिन्हें दिया जा रहा है।
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दान का सर्वाधिक लोकप्रिय अर्थ किसी जरूरतमन्द को सहायता के रूप में कुछ देना है। इस स्थिति में दान का सुख पाने के लिए पास में कुछ होना जरूरी है।

यह तो सही है कि किसी को कुछ देना हो तो वह वस्तु पर्याप्त रूप में पास होना जरूरी है। धन का महत्व क्योंकि सभी स्थूल पदार्थों में सबसे ज्यादा है।

ऐसा दान देकर भी दान का फल नहीं म‌िलता है

sprituality daan and dharm

विनिमय का प्रमुख साधन होने के कारण उससे सुख, सुविधा और जरूरत की सभी वस्तुएं हासिल की जा सकती है। लेकिन जरूरी नहीं कि देने के लिए धन ही हो। विद्या, परामर्श, सहयोग, समय, सहानुभूति, औषधि, उपचार, वस्त्र यहां तक कि सदभावना भी दी जाने वाली वस्तुओं के रूप में आती है।

किसी वस्तु पर अपना अधिकार समाप्त करके दूसरे का अधिकार स्थापित करना दान है। कोई वस्तु दान में दी गई किंतु उस वस्तु पर पानेवाले का अधिकार होने से पूर्व ही यदि वह वस्तु नष्ट हो गई तो वह दान नहीं कहा जा सकता। ऐसी परिस्थिति में यद्यपि दान देनेवाले को प्रत्यवाय नहीं लगता तो भी उसे पुण्यफल नहीं मिलता।

इसीलिए दान के तीन भेद कहे गए हैं। सात्विक, राजस और तामस, इन भेदों से दान तीन प्रकार का कहा या है। जो दान पवित्र स्थान में और उत्तम समय में ऐसे व्यक्ति को दिया जाता है जिसने दाता पर किसी प्रकार का उपकार न किया हो वह सात्विक दान है।

सोना चांदी का दान क्या है?

sprituality daan and dharm

अपने ऊपर किए हुए किसी प्रकार के उपकार के बदले में अथवा किसी फल की आकांक्षा से अथवा विवशतावश जो दान दिया जाता है वह राजस दान कहा जाता है।

अपवित्र स्थान एवं अनुचित समय में बिना सत्कार के, अवज्ञतार्पूक एवं अयोग्य व्यक्ति को जो दान दिया जाता है वह तामस दान कहा गया है। कायिक, वाचिक और मानसिक इन भेदों से पुन: दान के तीन भेद गिनाए गए हैं।

संकल्पपूर्वक सोने, चांदी, आदि का दान दिया जाता है वह कायिक दान है। अपने निकट किसी भयभीत व्यक्ति के आने पर जौ अभय दान दिया जाता है वह वाचिक दान है। जप और ध्यान प्रभृति का जो अर्पण किया जाता है उसे मानसिक दान कहते हैं।

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