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नहीं जानते होंगे, भगवान शिव के तीन नेत्रों का रहस्य

Fri, 28 Mar 2014 11:43 AM IST
राकेश/अमर उजाला, दिल्ली
राकेश/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 28 Mar 2014 11:43 AM IST
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shiv third eyes story of puran

भगवान भोले नाथ का एक नाम त्रिलोचन भी है क्योंकि एक मात्र भोले नाथ ही ऐसे हैं जिनकी तीन आंखें हैं। शिव के दो नेत्र तो सामान्य रुप से खुलते और बंद होते रहते हैं लेकिन तीसरी आंख शिव जी तभी खोलते हैं जब शिव जी बहुत क्रोधित होते हैं। इस नेत्र के खुलने का मतलब है प्रलय का आगमन।

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ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा बताती हैं शिव जी की तीसरी आंख सामान्य आखों की तरह दिखती नहीं है। शिव के तीन नेत्र इस बात का प्रतीक है कि भगवान शिव में तीनों लोक स्वर्ग, मृत्यु और पाताल समाहित है।
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भगवान शिव ही तीनों लोकों पर नजर रखते हैं। शिव के तीन नेत्र इस बात के प्रतीक चिन्ह हैं कि भगवान शिव है परमब्रह्म हैं। शिव ही संसार में व्याप्त तीनों गुण रज, तम और सत्व के जनक हैं। इनकी ही प्रेरणा से रज, तम और सत्व गुण विकसित होते हैं।
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शिव का तीसरा नेत्र वास्तव में ज्ञान नेत्र है, जिसके खुलने मात्र से काम भष्म हो जाता है। इसका प्रमाण है कि जब शिव जी ने पहली बार तीसरी आंख खोली तो कामदेव जलकर भष्म हो गए। शिव का तीसरा नेत्र मनुष्य के लिए ज्ञान रुपी नेत्र को विकसित करने की प्रेरणा देने वाला है ताकि मनुष्य धरती पर ज्ञान द्वारा काम और वासनाओं से मुक्त होकर मुक्ति प्राप्त कर सके।

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