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रावण की इस गलती के कारण कुंभकर्ण मारा गया

Thu, 02 Oct 2014 12:45 PM IST
Updated Thu, 02 Oct 2014 12:45 PM IST
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ramleela kumbhkarn vadh ravan airport

मेघनाद के मारे जाने के बाद रावण ने कुंभकर्ण को युद्घ में भेजने के लिए सोचने लगा। लेकिन समस्या यह थी कि कुंभकर्ण को नींद से कैसे जगाया जाए क्योंकि कुंभकर्ण छह महीने तक सोया रहता था। छह महीने बाद एक दिन जगता और भोजन करके फिर सो जाता क्योंकि इसने ब्रह्मा जी से निद्रासन का वरदान मांग लिया था।

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लेकिन किसी तरह कुंभकर्ण को जगाया गया। कुंभकर्ण ने रावण को सलाह दी कि राम से संधि कर लेने में भलाई है। लेकिन जब रावण नहीं माना तो कुंभकर्ण ने युद्घ में जाना स्वीकार कर लिया। इसने अपने विशाल शरीर से वानरों पर प्रहार करना शुरु कर दिया इससे राम की सेना में हहाकार मचा गया।

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सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए राम ने कुंभकर्ण को युद्घ के लिए ललकारा और भगवान राम के हाथों कुंभकर्ण वीरगति को प्राप्त हुआ। कुंभकर्ण को अगर रावण्ा नींद से नहीं जगाता या इसकी बात मान लेता तो न रावण मारा जाता और न कुंभकर्ण। लेकिन वही बात है कि 'होइहि सोइ जो राम रचि राखा'।

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चल‌िए रावण के हवाई अड्डा के बारे में जानें

ramleela kumbhkarn vadh ravan airport

कुंभकर्ण की मृत्यु के बाद रावण को स्वयं रणभूम‌ि में आना पड़ा। अगले अंक में राम और रावण युद्घ की रोमांक घटना को जानेंगे तब तक चल‌िए रावण का हवाई अड्डा देख आते हैं। देवाताओं के कोषाध्यक्ष क़ुबेर जो रिश्ते में रावण का भाई भी था। रावण ने उसे भी युद्घ में पराजित करके लंका से भगा दिया। कुबेर को तिब्बत जाकर शरण लेना पड़ा।

रावण ने कुबेर को पराजित करने के बाद उनसे भगवान विश्वकर्मा द्वारा बनाए पुष्पक विमान को छीनकर उस पर अधिकार कर लिया। यह विमान बिना ईंधन के चालक की इच्छा के अनुसार धीमी और तीव्र गति से उड़ सकता था। इसी विमान का निर्माण इस प्रकार किया गया जिससे इसे छोटा और बड़ा किया जा सकता है। जिससे कई व्यक्ति एक साथ इस विमान से यात्रा कर सकते थे। रामायण में वर्णित है कि रावण पंचवटी से माता सीता का हरण करके पुष्पक विमान से लंका लेकर आया था।

रावण का वध करने के बाद लंका से अयोध्या जाते समय राम, लक्ष्मण, सीता एवं हनुमान जी इसी विमान से अयोध्या लौटे थे। श्री लंका के श्रीरामायण रिसर्च कमेटी के अनुसार रावण के पास अपने पुष्क विमान को रखने के लिए चार हवाई अड्डे थे। इन चार हवाई उड्डे में से एक का नाम उसानगोड़ा था। इस हवाई अड्डे को हनुमान जी ने लंका दहन के समय जलाकर नष्ट कर दिया था। अन्य तीन हवाई अड्डे गुरूलोपोथा, तोतूपोलाकंदा और वारियापोला थे जो सुरक्षित बच गए।


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