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सत्य से हम क्यों भय खाते है
Updated Wed, 20 Mar 2013 09:14 PM IST
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सत्य को लोग सुनने से घबराते है। सत्य से हम क्यों
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भय खाते है? शायद सत्य उस दर्पण की तरह है। जो हमारा हमारे अंतस को पार
दर्श कर हमें नग्न कर देता है। ओशो