मरने से दो साल पहले ही उसने कर ली मरने के बाद की तैयारी
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एक इंसान मृत्यु के निकट था। उसकी इच्छा यह जानने की हुई कि उसे मरने के बाद कहां दफनाया जाएगा। किस ताबूत में दफनाया जाएगा। वहां किस तरह के फूल रखे जाएंगे।
उसने अपने जीवन के अंतिम दो वर्ष दफनाने की जगह ढूंढने में लगा दिए। एक दुकान में जाकर उसने अपने लिए ताबूत चुना।
उसने सोचा उसकी मृत्यु के बाद यही उसका घर होगा। मृत्यु से पहले उसने इसे देख लिया है। वह फूलों की दुकान पर गया।
उसे अभिमान हुआ कि उसने उन फूलों को देख लिया था जबकि कोई भी मृतक और दफनाया गया व्यक्ति उन्हें कभी नहीं देख पाता है।
उसी क्षण वह व्यक्ति ढेर हो गया और मर गया
तब उसने अपने परिवार और मित्रों की एक सभा बुलाई। और उन्हें अपनी निजी वस्तुएं बांट दी। अंत में उसने अपने पुत्र को अपनी वसीयत सौंप दी। उसी क्षण वह व्यक्ति ढेर हो गया और मर गया। इस वयक्ति ने अपने जीवन के अंतिम दो वर्ष अपने शरीर को मृत्यु के लिए तैयारी में लगाए।
पर उसने अपनी आत्मा को तैयार करने के लिए कुछ भी नहीं किया। हममें से अनेक लोग इस व्यक्ति से अलग नहीं है। जीवन के अंतिम दो वर्ष इस बात पर विचार करने में लगा दिए कि मृत्यु के बाद उसके शरीर को कहां और कैसे रखा जाएगा। पर उसने अपनी आत्मा को शाश्वत जीवन के लिए तैयार करने के लिए कुछ नहीं किया।