फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Wellness ›   pranav pandya thoght about basant

हर साल वसंत आने का यह रहस्य आप भी जान लीजिए

Sat, 24 Jan 2015 09:30 AM IST
डॉ. प्रणव पण्ड्या / शांतिकुंज हरिद्वार
डॉ. प्रणव पण्ड्या / शांतिकुंज हरिद्वार Updated Sat, 24 Jan 2015 09:30 AM IST
विज्ञापन
pranav pandya thoght about basant
भविष्य पुराण में उल्लेख मिलता है कि वसंत माघ की शुद्ध पंचमी में उल्लास के देव ‘काम’ और सौन्दर्य की देवी ‘रति’ की मूर्ति बनाकर सामूहिक रूप से पूजन किया जाता है। राजा भोज के ‘सरस्वती कण्ठाभरण’ नामक ग्रंथ में इस उत्सव का बड़े ही सुन्दर ढंग से चित्रण किया गया है।
विज्ञापन


‘हरि विलास’ में स्पष्ट ही उल्लेख मिलता है कि वसंत का उद्भव माघ शुक्ल वसंत पंचमी के दिन हुआ। कालिदास के ‘ऋतु संहार’ नामक ग्रंथ में प्रकृति और मानव सौन्दर्य के अनेक पहलुओं का वर्णन किया गया है। ‘रत्नावली’ ग्रन्थ में इसका ‘वसंतोत्सव’ एवं ‘मदनोत्सव’ दोनों ही नामों से उल्लेख मिलता है।

विज्ञापन


कवियों और विद्वज्जनों ने वसंत को प्रकृति और मनुष्यों के संवेदनशील संबंधों का साकार रूप में वर्णन किया है। संस्कृति और हिन्दी साहित्य की प्रायः प्रत्येक विधा में वसंत पर्व का वर्णन किसी न किसी रूप में किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कालिदास, माघ, भारवि आदि संस्कृत कवियों से लेकर वर्तमान संस्कृत-हिन्दी कवियों को भी वसंत के बारे वर्णन करते देखा जाता है। वसंत को ऋतुराज, कामसखा, पिकानन्द, पुष्पमास, पुष्प समय, मधुमाधव आदि नामों से सम्बोधित किया गया है।

वसंत के इस पर्व पर विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती के पूजन का भी विधान है। सरस्वती संगीत एवं कला की देवी के रूप में भारतीय संस्कृति और धर्म की आस्था के रूप में चिरकाल से पूजनीय रही है। कवियों और कलाकारों ने देवी सरस्वती को सत्यं-शिवं-सुन्दरम् के उच्चतम भाव से परिपूरित माना है।

माता सरस्वती के अर्चन-पूजन में हमें अज्ञान रूपी अन्धकार में ज्ञान रूपी प्रकाश, निराशा के दुखद क्षण में आशावान और उत्साह का संचार करते हुए एक नवीन स्फूर्ति की अनुभूति होती है। यह सब वसंत पंचमी का ही प्रभाव प्रकृति के माध्यम से मानव मात्र में दृष्टिगोचर होता है।

हमें प्रकृति के प्रति पल परिवर्तित रूप से शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। प्रति वर्ष वसंत के आने का यही रहस्य है कि हम उससे सदा मुस्कराते रहनी की प्रेरणा ग्रहण करें।


इस युग के महान ऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी, जिन्हें इस वसंत के ही दिन दिव्य दर्शन हुए, अपने आराध्य गुरुसत्ता से साक्षात्कार हुआ, जीवन में अपनायी जाने वाली गतिविधियों और महत्त्वपूर्ण क्रियाकलापों के बारे में दिशानिर्देश मिले, बहुत से रहस्यों से पर्दा उठा और जीवन निहाल हुआ, उन्होंने सदा मुस्कराते रहने की प्रेरणा दी है। वे कहते थे- जो खिलता-मुस्कराता रहे, वही वसंत है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स, परामनोविज्ञान समाचार, स्वास्थ्य संबंधी योग समाचार, सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed