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खुद को हिंदू या मुसलमान कहने वाले पढ़ लें यह सच
ओशो/अध्यात्मिक गुरु
Updated Thu, 25 Dec 2014 12:42 PM IST
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कोई हिंदू-घर में पैदा हो गया तो हिंदू है; मां-बाप ने एक आवरण ओढ़ा दिया। हिंदू-घर में पैदा हो गया तो वेद पढ़ता है, गीता को पूजता है। और यही बच्चा जैन-घर में पैदा होता तो इसे कभी फिक्र न रहती गीता की और वेद की और यह कभी हिंदू-मंदिर न जाता। यह जैन-मंदिर गया होता। इसने महावीर को पूजा होता। इसके मां-बाप ने इसे दूसरे कपड़े ओढ़ा दिए होते।
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तुम जो अभी, उधार हो, नगद नहीं। कृत्रिम हो। दूसरों ने तुम पर कुछ रंग दिया है; अभी तुमने अपना रंग जाना नहीं। तुम्हारे चेहरे पर दूसरों ने मुखौटे लगा दिए हैं और आईनों के समाने खड़े होकर उन्हीं मुखौटों को देखकर तुम समझते हो यह तुम्हारा चेहरा है। यह तुम्हारा चेहरा नहीं है। तुम्हारा चेहरा और परमात्मा का चेहरा भिन्न ही नही। तुम्हारा चेहरा वही है जो तुम जन्म के साथ लेकर आये थे, जिसका कोई नाम था; न जिसका कोई रूप; न जो हिंदू था, न मुसलमान न ईसाई न बौद्ध, जो न शूद्र था न ब्राह्मण जो बस था वह था।
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वह रूप या वह अरूप अब भी तुम्हारे भीतर मौजूद है। कितने ही कपड़े पहना दिये गये हों, तुम्हारा स्वभाव अब भी उन कपड़ों के भीतर मौजूद है। तुम अपनी नग्नता में अब भी अगर जाग जाओ तो उसे जान लो जो तुम्हारी निजता है। मगर तुमने तादात्मय कर लिया है। तुमने वस्त्रों को जोर से पकड़ लिया है। तुम कहते हो यही वस्त्र मैं हूं! और वहीं भूल हो गई है, वहीं चूक हो गई है।
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तुमने अपने नाम को समझ लिया कि यह मैं हूं। नाम लेकर आये थे? कोई तो नाम लेकर आता नहीं है। तुमने अपनी भाषा को समझ लिया कि यह मैं हूं। भाषा लेकर आये थे? कोई भाषा तो लेकर आता नहीं। न कोई धर्म लेकर आता है, न कोई देश लेकर आता है। ये सब बातें सीखा दी गई हैं। ये तुम्हें तोतों की तरह रटा दी गई हैं। तुम तोते बन गये हो और बड़े अकड़ रहे हो, क्योंकि तुम्हें वेद याद हैं, क्योंकि तुम्हें कुरान कंठस्थ है।
तुम्हारी अकड़ तो देखो! और तुम्हें जरा भी होश नहीं है कि तुम जब आए थे, न कुरान थी तुम्हारे पास न वेद थे तुम्हारे पास। तुम थे, एक कोरे कागज थे तुम! और जब तुम कोरे कागज थे तब तुम परमात्मा से जुड़े थे। जब से तुम्हारा कागज गूद दिया गया है तब से तुम समाज से जुड़ गये हो। तब से तुम अपने से टूट गये हो और भीड़ से जुड़ गये हो। तब से तुम भीड़ के हिस्से हो गये हो, तुम्हारी आत्मा खो गई है।
ओशो वर्ल्ड फाउंडेशन, नई दिल्ली