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'मैंने तो सुना है कि वृंदावन में सिर्फ एक पुरूष हैं...'
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
Updated Fri, 28 Sep 2012 05:12 PM IST
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वृंदावन भगवान श्री कृष्ण की लीला स्थली रही है। ऐसा माना जाता है कि वृंदावन के कण-कण में श्री कृष्ण समाये हुए हैं। ऐसे स्थान के बारे में यह कहा जाए कि "यहां सिर्फ एक पुरूष है और शेष सभी स्त्रियां", तो सुनकर आप शायद हैरान हो जाएंगे। लेकिन यह पूरी तरह सच है, और यह हम नहीं कृष्ण की अनन्य भक्त मीरा कहती हैं।
इस संदर्भ में एक बड़ी ही सुंदर कथा है। एक बार मीरा द्वारिका से वृंदावन आयी। इनके साथ साधु-संतों की टोली थी जिसमें कई स्त्रियां भी थी। शाम हो जाने के कारण सभी ने आगे जाना उचित नहीं समझा। मीरा ने कहा पास ही जीव गोस्वामी जी का आश्रम है। सभी लोग जीव गोस्वामी के आश्रम पहुंचे। गोस्वामी जी के सेवक ने मीरा की टोली को आश्रम के बाहर ही रोक दिया। सेवक ने कहा कि गोस्वामी जी किसी स्त्री से नहीं मिलते हैं।
सेवक की बात सुनकर मीरा मुस्कुरायी और एक पत्र लिखकर सेवक को दिया। सेवक उस पत्र को लेकर गोस्वमी जी के पास पहुंचा। पत्र पढ़ते ही गोस्वामी जी दौड़कर बाहर आये और मीरा से क्षमा मांगने लगे। मीरा ने पत्र में लिखा था, 'मैंने तो सुना है कि वृंदावन में सिर्फ एक पुरूष हैं श्री कृष्ण बाकि सभी तो गोपी भाव से श्री कृष्ण की भक्ति करते हैं। मुझे नहीं पता है कि कृष्ण के अलावा कोई दूसरा पुरूष भी वृंदावन में मौजूद है।'
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मीरा के इस कथन का सार गीता में भी मिलता है। श्री कृष्ण कहते हैं, 'यह संसार प्रकृति अर्थात स्त्री है और मैं परमात्मा ही एक मात्र पुरूष हूं। मैं ही प्रकृति में बीज की स्थापना करके सृष्टि चक्र का संचालन करता हूं। इसलिए स्त्री और पुरूष का भेद करना मूर्खता है। मृत्यु के बाद स्त्री हो अथवा पुरूष सभी लिंग भेद से मुक्त हो जाते हैं।'
भगवान शिव का अर्धनारीश्वर रूप भी यह ज्ञान देता है कि स्त्री और पुरूष का भेद अज्ञानता है। जो इनमें भेद करता है वह ईश्वर का अपमान करता है। ईश्वर को पाने के लिए जरूरी है कि स्त्री-पुरूष का भेद-भाव त्याग कर सभी में समभाव रखें।
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इस संदर्भ में एक बड़ी ही सुंदर कथा है। एक बार मीरा द्वारिका से वृंदावन आयी। इनके साथ साधु-संतों की टोली थी जिसमें कई स्त्रियां भी थी। शाम हो जाने के कारण सभी ने आगे जाना उचित नहीं समझा। मीरा ने कहा पास ही जीव गोस्वामी जी का आश्रम है। सभी लोग जीव गोस्वामी के आश्रम पहुंचे। गोस्वामी जी के सेवक ने मीरा की टोली को आश्रम के बाहर ही रोक दिया। सेवक ने कहा कि गोस्वामी जी किसी स्त्री से नहीं मिलते हैं।
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सेवक की बात सुनकर मीरा मुस्कुरायी और एक पत्र लिखकर सेवक को दिया। सेवक उस पत्र को लेकर गोस्वमी जी के पास पहुंचा। पत्र पढ़ते ही गोस्वामी जी दौड़कर बाहर आये और मीरा से क्षमा मांगने लगे। मीरा ने पत्र में लिखा था, 'मैंने तो सुना है कि वृंदावन में सिर्फ एक पुरूष हैं श्री कृष्ण बाकि सभी तो गोपी भाव से श्री कृष्ण की भक्ति करते हैं। मुझे नहीं पता है कि कृष्ण के अलावा कोई दूसरा पुरूष भी वृंदावन में मौजूद है।'
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मीरा के इस कथन का सार गीता में भी मिलता है। श्री कृष्ण कहते हैं, 'यह संसार प्रकृति अर्थात स्त्री है और मैं परमात्मा ही एक मात्र पुरूष हूं। मैं ही प्रकृति में बीज की स्थापना करके सृष्टि चक्र का संचालन करता हूं। इसलिए स्त्री और पुरूष का भेद करना मूर्खता है। मृत्यु के बाद स्त्री हो अथवा पुरूष सभी लिंग भेद से मुक्त हो जाते हैं।'
भगवान शिव का अर्धनारीश्वर रूप भी यह ज्ञान देता है कि स्त्री और पुरूष का भेद अज्ञानता है। जो इनमें भेद करता है वह ईश्वर का अपमान करता है। ईश्वर को पाने के लिए जरूरी है कि स्त्री-पुरूष का भेद-भाव त्याग कर सभी में समभाव रखें।