फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Wellness ›   old age is golden chapter of life acharya pulak sagar

बुढ़ापा जीवन का सुनहरा अध्याय है: पुलक सागर

Wed, 07 Nov 2012 12:07 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क। Updated Wed, 07 Nov 2012 12:07 PM IST
विज्ञापन
old age is golden chapter of life acharya pulak sagar
बूढा आदमी दुनिया का सबसे बडा विश्वविद्यालय है। बूढे की एक एक झुर्रियों में जीवन के हजार-हजार अनुभव लिखे होते हैं। बूढे की कांपती हुई गर्दन कहती है कि दुनिया में कुछ भी सार नही है उसके कांपते हुए हाथ कहते हैं कि परोपकार और दान करना हो तो आज ही कर लो, वर्ना कल कुछ न कर पाओगे। उसके लड़खडाते पैर कहते हैं कि तीर्थ यात्रा आज ही कर डालो, वर्ना हम लाचार हो जाएंगे।
विज्ञापन


दुनिया में ऐसा कोई भी नही है जो सदैव युवा रहे। राम, कृष्ण, महावीर सभी को बुढापा आया। लेकिन यह मत समझो कि बुढापा जीवन का अन्तिम सफर है। बुढापा तो जीवन का एक सुनहरा अध्याय है। किसी भी बूढे को निराश और हताश नही होना चाहिए। 20 साल का जवान भी निराशवादी है तो वह बूढा है और यदि 80 साल बूढा भी आशवादी है तो वह जवान है।
विज्ञापन


यह मत सोचना कि बुढापे में कुछ नही कर सकते, 70 साल की उम्र में सुकरात साहित्य की रचना करते थे। 80 साल की उम्र में कीरो ने ग्रीक भाषा सीखी थी और 90 वर्ष की उम्र तक पिकासो चित्र बनाते रहे। जब 70 साल की उम्र में महात्मा गांधी देश की आजादी के लिए लड़ सकते हैं तो हम बुढापे से क्यों नही लड़ सकते। बुढापे में कभी खाली मत बैठना, कुछ न कुछ करते रहना।
विज्ञापन
विज्ञापन


जो लोग जवानी में ज्यादा इतराते हैं उन्हे बुढापे में आंसू बहाने पड़ते हैं इसलिए जवानी ढंग से गुजारें, बुढापे में रोना नही पडेगा। घड़ी के तीन कांटे देखना, सेकेण्ड का कांटा बचपन का प्रतीक है जो बहुत तेज भागता है। मिनट का कांटा जवानी का प्रतीक है जो बचपन से थोडा धीरे चलता है लेकिन काम करता दिखता है। घंटे का कांटा बुढ़ापे का प्रतीक है जो चलता हुआ दिखता तो नही, लेकिन फिर भी चलता है।

बचपन और जवानी तो जल्दी भागती है बुढापा धीरे धीरे खिसकता है। जवानी को लाख बचाना चाहो पर वह बचती नही, लाख दवाएं खा लो कि, बुढापा ना आए लेकिन बुढापा तो आता ही है। सफेद बाल काले कर सकते हो फिर भी बुढापा नही रूकता। प्लास्टिक सर्जरी भी करा लो तो भी बुढापा निश्चित आएगा।

परिवार में सुखी रहना है तो बुढ़ापे में बहू और बेटों के बीच ज्यादा हस्तक्षेप मत करो। ज्यादा हस्तक्षेप करने से परिवार के लोग टूटने लगते हैं और मन भी अशांत होने लगता है। बुढापा यदि सुख से गुजारना है तो अपने घर को अपना घर न समझकर पड़ोसी का घर समझो। जो व्यवहार अपने पड़ोसी से करते हैं वही अपने बेटे-बहू से करो, समय पर भोजन मिले चुपचाप भोजन कर लो, बाकी समय हरि का भजन करो।


पुलकसागर परिचय
जैन मुनि पुलकसागर जी का जन्म 11 मई 1970 ई. में धाम्त्री, छत्तीसगढ़ में हुआ था। दीक्षा प्राप्ति से पूर्व इनका नाम पारस जैन था। ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हुए धर्म प्रचार के लिए इन्होंने 27 जनवरी 1993 को गृह त्याग कर दिया। आचार्य श्री पुष्पदंत सागरजी महाराज से इन्होंने दीक्षा प्राप्ति की और जन कल्याण की भावना से जनकल्याण में समर्पित हो गये।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स, परामनोविज्ञान समाचार, स्वास्थ्य संबंधी योग समाचार, सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed