{"_id":"e2d09d00-4f3f-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"obstacle-is-lesson-for-us","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीवन की बाधाओं में भी छुपी होती है अच्छाई ","category":{"title":"Wellness","title_hn":"पॉज़िटिव लाइफ़","slug":"wellness"}}
जीवन की बाधाओं में भी छुपी होती है अच्छाई
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
Updated Wed, 26 Dec 2012 03:07 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जीवन में सब कुछ सामान्य चल रहा
विज्ञापन
हो और अचानक कुछ समस्या आते ही हम कहने लगते हैं 'हे भगवान ये क्या कर रहे हो' जीवन
में स्पीड ब्रेकर को हम स्वीकार ही नहीं करना चाहते। जबकि स्पीड ब्रेकर खुद हमारे
लिए और दूसरों की सुरक्षा के लिए बनाए जाते हैं। अगर अपनी सोच सकारात्मक रखेंगे और
जीवन में आने वाली बाधा का विश्लेषण करेंगे तो पाएंगे कि इसमें भी कहीं न कहीं
हमारे लिए अच्छाई छुपी हुई है।
ज्योतिषशास्त्र का नियम है कि व्यक्ति के जीवन में हर तीस साल के बाद साढ़ेसाती आती है। साढ़ेसाती लोगों को भक्ति और परिश्रम के लिए प्रेरित करती है। जो व्यक्ति साढ़ेसाती के दौरान भक्ति और परिश्रम करता है शनि की उतरती साढ़ेसाती में उसे अपनी मेहनत का संपूर्ण लाभ मिलता था। यही कारण था कि प्राचीन काल में लोग अधीरतापूर्वक साढ़ेसाती का इंतजार करते करते थे।
आज का मनुष्य साढ़ेसाती के नाम से घबराता है। मनुष्य इसे अपनी रफ्तार के बीच में स्पीड ब्रेकर मानता है। जबकि ईश्वर ने जान-बूझकर ऐसी व्यवस्था की है कि मनुष्य जीवन का अर्थ समझे, अपनी मुक्ति के लिए प्रयास करे और मेहनत के फल का महत्व समझे। वास्तव में ईश्वर की हर बात में मनुष्य की भलाई छुपी होती है।
संदर्भ में कथा
इस संदर्भ में बहुत ही रोचक कथा है। एक राजा थे, उनका मंत्री बहुत ही समझदार था। मंत्री अक्सर यह कहता था कि जो होता है अच्छा होता है। एक बार राजा अपने मंत्री के साथ शिकार करने गया। रास्ता भटक जाने के कारण राजा और मंत्री बिछड़ गये। शिकार के दौरान एक शेर ने राजा को दबोच लिया। राजा ने अपने आपको बहुत बचाने की कोशिश की लेकिन शेर ने राजा की एक उंगली खा ली। इसी बीच मंत्री वहां पहुंच गया और उसने राजा की जान बचाई। राजा की कटी हुई उंगली देखकर मंत्री ने कहा कि चलो भगवान जो करता है अच्छे के लिए करता है।
राजा को मंत्री की बात पर बहुत क्रोध आया और उसने मंत्री को एक पेड़ से बांध दिया। इसके बाद जंगल में आगे चल पड़ा। राजा को कुछ आदिवासियों ने पकड़ लिया और बंदी बना लिया। अदिवासियों ने कहा कि कुल देवी की प्रसन्नता के लिए तुम्हारी बलि देंगे। रात में बलि देने की तैयारी हुई। जब राजा की बलि दी जाने वाली थी उसी समय आदिवासियों के पुरोहित ने देखा कि राजा की एक उंगली नहीं। पुरोहित ने कहा कि राजा एक अंग कटा हुआ है, यह संपूर्ण नहीं है इसलिए देवी इसकी बलि स्वीकार नहीं करेगी। राजा को आदिवासियों ने मुक्त कर दिया।
राजा लौटकर मंत्री के पास आया और सारी घटना बतायी। मंत्री ने कहा कि मैंने कहा था न 'भगवान जो करता है भले के लिए'। राजा ने कहा, लेकिन मैंने जो तुम्हें पेड़ से बांध दिया यह तो उचित नहीं किया।' मंत्री ने कहा यह भी उचित था महाराज अगर आप मुझे साथ ले जाते तो आदिवासी मेरी बलि चढ़ा देते। इसलिए भगवान जो करता है अच्छा करता है।
ज्योतिषशास्त्र का नियम है कि व्यक्ति के जीवन में हर तीस साल के बाद साढ़ेसाती आती है। साढ़ेसाती लोगों को भक्ति और परिश्रम के लिए प्रेरित करती है। जो व्यक्ति साढ़ेसाती के दौरान भक्ति और परिश्रम करता है शनि की उतरती साढ़ेसाती में उसे अपनी मेहनत का संपूर्ण लाभ मिलता था। यही कारण था कि प्राचीन काल में लोग अधीरतापूर्वक साढ़ेसाती का इंतजार करते करते थे।
आज का मनुष्य साढ़ेसाती के नाम से घबराता है। मनुष्य इसे अपनी रफ्तार के बीच में स्पीड ब्रेकर मानता है। जबकि ईश्वर ने जान-बूझकर ऐसी व्यवस्था की है कि मनुष्य जीवन का अर्थ समझे, अपनी मुक्ति के लिए प्रयास करे और मेहनत के फल का महत्व समझे। वास्तव में ईश्वर की हर बात में मनुष्य की भलाई छुपी होती है।
संदर्भ में कथा
इस संदर्भ में बहुत ही रोचक कथा है। एक राजा थे, उनका मंत्री बहुत ही समझदार था। मंत्री अक्सर यह कहता था कि जो होता है अच्छा होता है। एक बार राजा अपने मंत्री के साथ शिकार करने गया। रास्ता भटक जाने के कारण राजा और मंत्री बिछड़ गये। शिकार के दौरान एक शेर ने राजा को दबोच लिया। राजा ने अपने आपको बहुत बचाने की कोशिश की लेकिन शेर ने राजा की एक उंगली खा ली। इसी बीच मंत्री वहां पहुंच गया और उसने राजा की जान बचाई। राजा की कटी हुई उंगली देखकर मंत्री ने कहा कि चलो भगवान जो करता है अच्छे के लिए करता है।
राजा को मंत्री की बात पर बहुत क्रोध आया और उसने मंत्री को एक पेड़ से बांध दिया। इसके बाद जंगल में आगे चल पड़ा। राजा को कुछ आदिवासियों ने पकड़ लिया और बंदी बना लिया। अदिवासियों ने कहा कि कुल देवी की प्रसन्नता के लिए तुम्हारी बलि देंगे। रात में बलि देने की तैयारी हुई। जब राजा की बलि दी जाने वाली थी उसी समय आदिवासियों के पुरोहित ने देखा कि राजा की एक उंगली नहीं। पुरोहित ने कहा कि राजा एक अंग कटा हुआ है, यह संपूर्ण नहीं है इसलिए देवी इसकी बलि स्वीकार नहीं करेगी। राजा को आदिवासियों ने मुक्त कर दिया।
राजा लौटकर मंत्री के पास आया और सारी घटना बतायी। मंत्री ने कहा कि मैंने कहा था न 'भगवान जो करता है भले के लिए'। राजा ने कहा, लेकिन मैंने जो तुम्हें पेड़ से बांध दिया यह तो उचित नहीं किया।' मंत्री ने कहा यह भी उचित था महाराज अगर आप मुझे साथ ले जाते तो आदिवासी मेरी बलि चढ़ा देते। इसलिए भगवान जो करता है अच्छा करता है।