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बंदर की खरीद बिक्री का ऐसा खेल जो खेला वह पछताया, आप तो नहीं खेल रहे
जमनादास अख्तर
Updated Wed, 10 Aug 2016 04:19 PM IST
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बंदर
- फोटो : अमर उजाला
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मगध देश के चक्रपा गांव में सुकलनाथ नाम का एक आदमी आया। उसने गांव वालों से कहा कि वह बंदर खरीदने आया है, और दस पण (सिक्के) के हिसाब से बंदर खरीदेगा। गांव में बहुत से बंदर थे। कई लोग इस काम में तुरंत लग गए। सुकल ने दस पण के हिसाब से करीब दस हजार बंदर खरीद लिए। बंदरों की संख्या काफी घट गई और धीरे-धीरे गांव वालों ने बंदर पकड़ना बंद कर दिया। सुकल ने फिर घोषणा की कि अब वह बीस पण में एक बंदर खरीदेगा। गांव वाले फिर से बंदर पकड़ने लगे।
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और बढ़ गए बंदर के दाम
चंपावत के कई इलाकों में बंदरों की दहशत
- फोटो : अमर उजाला
बहुत जल्द बंदरों की संख्या इतनी घट गई कि लोग यह काम छोड़कर खेती-बाड़ी में लगने लगे। फिर एक बंदर के लिए पचीस पण दिए जाने लगे, लेकिन बंदरों की संख्या इतनी कम हो चुकी थी कि उन्हें पकड़ना तो दूर, देखने तक के लिए भी बहुत मेहनत करनी पड़ती थी। तब सुकल ने घोषणा की कि एक बंदर के पचास पण मिलेंगे। लेकिन इस बार बंदर खरीदने का काम उसकी गैरमौजूदगी में उसका सहायक करेगा।
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इसलिए बेचने वाले ख्ाुद बंदर खरीदने लगे
बंदर
सुकल की गैरमौजूदगी में उसके सहयोगी ने गांव वालों से कहा कि वे पिंजड़े में बंद बंदर पैंतीस पण में खरीद लें और जब उसका मालिक आए तो उसे पचास पण में बेच दें। अगर मेरे मालिक लौटकर मुझसे पिंजरे में बंद बंदरों के बारे में पूछेंगे, तो मैं बहाना बनाकर कह दूंगा कि वे भाग गए। वैसे आप लोगों को इससे क्या, आप तो सस्ते में खरीदकर महंगा बेचने की तैयारी करो।
और फिर हुआ ऐसा अंजाम लोग हुए परेशान
पानी के टैंक में डूबने से 10 बंदरों की मौत
- फोटो : अमर उजाला
बस फिर क्या था, गांव वालों ने अपनी सारी जमा-पूंजी बंदरों को खरीदने में लगा दी। सुकल के सारे बंदर बिक गए। बिक जाने के बाद न कभी सुकल दिखाई दिया और न ही उसका सहयोगी। गांव में चारों तरफ बंदर ही बंदर थे। लेकिन अब पछताने से क्या होने वाला था। गांव वालों को समझ में आ गया कि लुभावने वायदों में कभी नहीं आना चाहिए। लुभावने वायदों के सौदागर सीधे-सादे लोगों को छलने का ही काम करते हैं।