भगवान श्री कृष्ण की इन लीलाओं का रहस्य आपने नहीं जाना होगा
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अर्जुन श्रीकृष्ण से कहते हैं कि मेरा मन बहुत चंचल है। उसे वश मे कैसे करूं? भगवान कहते हैं, अभ्यास और वैराग्य के जरिए मन वश में किया जाता है।
मन में राग है, इसलिए मन चंचल है। गोपियां अपने मन को श्रीकृष्ण से बचाने की कोशिश करती हैं। श्रीकृष्ण सखाओं के साथ जाकर गोपियों के घर से मक्खन की चोरी करते हैं।
फरियाद लेकर आई हुई गोपियों से मां यशोदा कहती हैं, तुम समझती क्यों नहीं हो। तुम अंधेरे में मक्खन रखो जिससे मेरे लाला को पता ही न चले।
गोपियों ने कहा, तुहारा लाला जहां जाता है वहां उजियारा ही हो जाता है। उनसे कुछ छिपा हुआ नहीं है। इनसे किस तरह से बचाके रखें?
मटकी फोड़ने और ऊखल बंधन की लीला का मतलब
भगवान कहते हैं, मेरा काम भव बंधन से छुड़ाने का है, मेरे प्रिय वैष्णव, भक्त, मोह की रस्सी से संसार के किसी न किसी खूंटे के साथ बंधे हुए हैं।
मेरे भक्तों को छुड़ाने का काम मेरा है। उपनिषद रूपी गाय को दोहने वाले श्रीकृष्ण हैं। अर्जुन जैसे जो भक्त हैं वह वत्स-बछड़ा है और जो दोहन होता है वह दूध गीता रूपी दूध है।
एक गोपी कहती है कि मेरे सोते हुए लड़के को तुम्हारा लाला आकर चूंटी भर के जगाता है और वह जब रोता है तब तुम्हारा लाला हंसता है। बालक यानि अज्ञानी जीव।
भगवान कहते हैं कि, मैया, यह गोपियां आधा सच बोलती हैं। सबसे पहले मैं उनको वचन से जगाता हूं फिर भी वह न जागता तो उसे हिला के जगाता हूं कि जागो।
सुबह हो गई। फिर भी अगर नहीं जागता तो फिर चूंटी लेता हूं। मटका फोडऩे की लीला हो अथवा ऊखल के साथ बांधने की। चाहे अन्य कोई, सब के पीछे कोई न कोई संदेश मानव के लिए छिपा है।