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साल की 12 संक्रांतियों में इसलिए है मकर संक्रांति सबसे खास
Updated Tue, 12 Jan 2016 10:24 PM IST
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मकर संक्रांति गतिशीलता का त्योहार है। संक्रांति का शाब्दिक अर्थ ‘वेग या गति’ को कहते है। “मकर संक्रांति” एक ऐसा पर्व है, जिस दिन राशिचक्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो जाता है। हमें धरती पर जो भी नए बदलाव महसूस होते और दिखाई देते है ये गतिशीलता में नए परिवर्तन से होते हैं। पूरे साल में कई संक्रांतियां आती हैं और प्रत्येक बार राशिचक्र में परिवर्तन होता है तो उसे हम संक्रांति कहते हैं। यदि यह गतिशीलता रुक जाएगी तो हमारे मानव जीवन से जुड़ी हुई प्रत्येक चीजें रुक जाएगी।
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‘मकर संक्रांति’ को खेत-खलियानों, फसलों से जुड़े हुए त्योहार के रूप में भी मनाया जाता है। असल में मकर संक्रांति वह समय है,जब हमारे खेतों में फसलें तैयार हो चुकी होती है और हम फसलों के तैयार हो जाने की खुशियां मनाते हैं। संक्रांति के दिन ही हम हर उन चीजों का आभार प्रकट करते हैं, जिसने खेती तथा फसल उगाने में हमारी सहायता की है।
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खेती करने में कृषि से जुड़े हुए पशुओं का एक महत्वपूर्ण एवं बहुत बड़ा योगदान होता है, इनके बिना तो खेती करना फसलें उगाना असंभव सा है, इसलिए उनके लिए भी मकर संक्रांति का एक दिन होता है। मकर संक्रांति का पहले दिन धरती का, दूसरे दिन हम मानव का और तीसरे दिन मवेशियों का होता है। धरती को प्रथम स्थान इसलिए दिया गया है,क्योंकि धरती से ही हमारा अस्तित्व है। इसलिए मकर संक्रांति को फसलों का त्योहार भी कहते है।
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