सीख: जीवन में जो जोखिम लेते हैं, उनके सफल होने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं
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अंतिमा एक बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करती थी। वह अपने काम में बेहद कुशल थी, इसीलिए कई बड़े-बड़े प्रोजेक्ट उसके पास आते थे। नोएडा में ही उसने एक छोटा-सा घर ले लिया था, जहां वह और उसकी मां आराम से रहा करती थीं। लेकिन एक दिन मैनेजर ने अंतिमा को बुलाकर कहा कि उसे एक बड़े प्रोजेक्ट के लिए कंपनी प्रमोट कर मुंबई भेज रही है। अंतिमा का दिल टूट-सा गया। एक तरफ प्रमोशन था, दूसरी तरफ उसका घर। उसने जब मां को बताया, तो वह बहुत खुश हुईं। वह अगले दिन सुबह उठते ही अंतिमा के साथ मिलकर सारे पौधे उखाड़ने में लग गईं। पौधे एक बड़ी-सी क्यारी में लगे हुए थे, लेकिन अब मुंबई ले जाने के लिए उन्हें गमलों में करना पड़ रहा था। पौधे भी हरे-भरे नजर आते थे, क्योंकि पिछले छह साल में उन्हें बड़ी जगह मिल गई थी। अंतिमा उन पौधों को अपने बच्चों की तरह पालती थी।
उसने मां से पूछा, क्या हम इन पौधों को यहीं रहने दे? इन्हें निकाल कर एक जगह से दूसरी जगह ले जाएंगे, तो ये सूख भी हो सकते हैं। मां बोलीं, तुम व्यर्थ ही चिंता कर रही हो। पौधों को हम जितना भी हिलाएं-डुलाएंगे, इनकी जड़ें उतनी ही मजबूत होंगी। ये बिलकुल हमारी तरह होते हैं। हम भी अक्सर अपनी जिंदगी में बदलाव से बचते हैं। हमें वह करना अच्छा लगने लगता है, जिसे करने में हमें सहूलियत हो। इसलिए हम अपनी जिंदगी में जोखिम उठाने से बचना चाहते हैं। लेकिन हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि जो लोग अपने जीवन में जोखिम लेते हैं, उनके सफल होने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं। और फिर यह भी सोचना चाहिए कि अगर हम इन पौधों को यहीं छोड़ दें, तो ये आगे लहलहाते ही रहेंगे, इसकी क्या गारंटी? मां की वह बात सिर्फ पौधों के लिए ही नहीं, अंतिमा की जिंदगी के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण थी।