{"_id":"5b58712a-dd45-11e1-975e-d4ae52ba91ad","slug":"let-faith-cure-your-disease","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्वास करो और रोग से मुक्त हो जाओ","category":{"title":"Wellness","title_hn":"पॉज़िटिव लाइफ़","slug":"wellness"}}
विश्वास करो और रोग से मुक्त हो जाओ
Updated Fri, 03 Aug 2012 01:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रार्थना में शक्ति है। इतनी शक्ति की अपने लिए की गई प्रार्थना तो असर करती ही है, किसी दूसरे व्यक्ति के लिए की गई प्रार्थना का भी असर होता है। प्रार्थना की शक्ति का इस कदर साक्षात हुआ है कि उसे बाकायदा चिकित्सा का दर्जा भी मिल रहा है। इस चिकित्सा पद्धति को नाम भी प्रार्थना चिकित्सा दिया गया है।
यूरोपीय देशों में ईसाइयों का एक संप्रदाय है 'क्वेकर'। इस संप्रदाय के अनुयायी बहुत सीमित संख्या में हैं और उनका मानना है कि प्रार्थना सभी रोगों का उपचार है। उपचार की इस पद्धति का कायदे से इस्तेमाल किया जाए तो सामान्य और जटिल सभी प्रकार के रोग ठीक हो सकते हैं।
इस चिकित्सा पद्धति को व्यवस्थित रूप देने में लगे पादरी जान डियो मर्सिया का कहना है कि रोगमुक्त लिए सिर्फ विश्वास का होना ही जरूरी है। विश्वास सुदृढ़ हो तो रोगी सिर्फ सोचे और अपने आपको आदेश दे कि ठीक हो जाओ तो वह रोग से छुटकारा पा जाता है।
विज्ञापन
दुनिया के तमाम देशों में माना जाता है कि साधु-संतों के आशीर्वचन, उनका सान्निध्य तथा आशीष पाकर मनुष्य को बीमारियों से मुक्ति सहज ही मिल जाती है। इसके लिए व्यक्ति के मन में यह विश्वास होना चाहिए कि किसी भी रोग अथवा समस्या के समाधान हेतु मानव के पास ईश्वरीय शक्ति सदैव मौजूद होती है।
क्वेकर चिकित्सा पद्धति सीखने वालों में ईमानदारी, सकारात्मकता एवं स्पष्टवादिता होना चाहिए। क्वेकर संप्रदाय की मूल आस्था प्रार्थना और विश्वास है। डियो मर्सिया के अनुसार व्यक्ति बीमार ही तब पड़ता है जब उसका विश्वास खंडित होता है। क्वेकर थेरैपी पर काम करने वालों को सिखाया जाता है कि वे लोगों में विश्वास कैसे जगाएं?
अभ्यास करने वाले शुरुआत ही इस प्रार्थना से करते हैं कि प्रभु मेरा मार्ग दर्शन करें और मुझे शक्ति प्रदान करें कि मैं लोगों में विश्वास जगा सकूं। देखा गया है कि इस चिकित्सा पद्धति का लाभ उन्हें ही मिलता है जो सकारात्मक विचारों के साथ पूरी आस्था एवं विश्वास के साथ प्रार्थना को ग्रहण करते हैं।
विज्ञापन
यूरोपीय देशों में ईसाइयों का एक संप्रदाय है 'क्वेकर'। इस संप्रदाय के अनुयायी बहुत सीमित संख्या में हैं और उनका मानना है कि प्रार्थना सभी रोगों का उपचार है। उपचार की इस पद्धति का कायदे से इस्तेमाल किया जाए तो सामान्य और जटिल सभी प्रकार के रोग ठीक हो सकते हैं।
विज्ञापन
इस चिकित्सा पद्धति को व्यवस्थित रूप देने में लगे पादरी जान डियो मर्सिया का कहना है कि रोगमुक्त लिए सिर्फ विश्वास का होना ही जरूरी है। विश्वास सुदृढ़ हो तो रोगी सिर्फ सोचे और अपने आपको आदेश दे कि ठीक हो जाओ तो वह रोग से छुटकारा पा जाता है।
विज्ञापन
दुनिया के तमाम देशों में माना जाता है कि साधु-संतों के आशीर्वचन, उनका सान्निध्य तथा आशीष पाकर मनुष्य को बीमारियों से मुक्ति सहज ही मिल जाती है। इसके लिए व्यक्ति के मन में यह विश्वास होना चाहिए कि किसी भी रोग अथवा समस्या के समाधान हेतु मानव के पास ईश्वरीय शक्ति सदैव मौजूद होती है।
क्वेकर चिकित्सा पद्धति सीखने वालों में ईमानदारी, सकारात्मकता एवं स्पष्टवादिता होना चाहिए। क्वेकर संप्रदाय की मूल आस्था प्रार्थना और विश्वास है। डियो मर्सिया के अनुसार व्यक्ति बीमार ही तब पड़ता है जब उसका विश्वास खंडित होता है। क्वेकर थेरैपी पर काम करने वालों को सिखाया जाता है कि वे लोगों में विश्वास कैसे जगाएं?
अभ्यास करने वाले शुरुआत ही इस प्रार्थना से करते हैं कि प्रभु मेरा मार्ग दर्शन करें और मुझे शक्ति प्रदान करें कि मैं लोगों में विश्वास जगा सकूं। देखा गया है कि इस चिकित्सा पद्धति का लाभ उन्हें ही मिलता है जो सकारात्मक विचारों के साथ पूरी आस्था एवं विश्वास के साथ प्रार्थना को ग्रहण करते हैं।