7 साल से एक ही हीरा पहन रखा है? जानिए इसका बड़ा खतरा
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परिवार की सुख समृद्घि,आर्थिक स्थिति को मजबूत करने, खुशहाली आदि के लिए अधिकतर लोग अपनी अंगुलियों में रत्न पहनते हैं। माना जाता है एक बार रत्न पहनने के बाद सभी परेशानियां दूर हो जाती है। अगर आप भी यही सोचते है कि एक बार अंगुली में रत्न पहनने मात्र से ही सभी समस्याओं का समाधान निकल जाता है तो आप गलत सोच रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि सभी रत्नों की आयु निर्धारित होती है और इनका प्रभाव निर्धारित आयु सीमा तक ही होता है। जानिए आपके रत्न की आयु सीमा
- माणिक्य की आयु सीमा चार साल चार माह होती है। इसके बाद इस रत्न का प्रभाव कम हो जाता है।
- अगर आप सोचते है कि मोती कभी खराब नही होती है तो एक बार अपनी मोती को देख लें। बेशक उसकी चमक पहले जैसी ही होगी, लेकिन दो वर्ष दो माह बाद उसका प्रभाव कम हो जाता है।
- मूंगा की उम्र तीन साल तीन माह की ही होती है।
- पुखराज की उम्र 4 वर्ष चार माह से अधिक नहीं होती है।
- हीरे की उम्र सबसे अधिक होती है। हीरे का प्रभाव सात साल सात माह तक रहता है।
- नीलम हीरे के बाद दूसरा ऐसा रत्न है, जिसकी उम्र अधिक होती है। नीलम की उम्र 5 वर्ष 5 माह की होती है।
- गोमेद और लहसुनिया दोनो रत्नों की उम्र तीन वर्ष तीन माह की होती है।
- उपरत्नों की आयु रत्नों के काफी कम होती है। माणिक्य, मोती, मूंगा, पन्ना और शुक्र के उपरत्न की उम्र एक वर्ष होती है।
- पुखराज के उपरत्न की उम्र 13 माह होती है।
- उपरत्नों में शनि के उपरत्न की आयु सबसे अधिक होती है। इसकी उम्र ढ़ाई साल होती है।
- गोमेद और केतु के उपरत्न की आयु 18 माह होती है।