दूसरों की पत्नी या बहन बेटियों को घूरते हैं तो आपका होगा यह अंजाम
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अगर आपकी आदत है कि राह चलत हुए या अड़ोस पड़ोस की महिलाओं को घूर-घूरकर देखना और उनके विषय में मन में बुरे ख्याल लाना तो समझ लीजिए आपके बुरे दिन आने वाले हैं।
यह बात आज नहीं कही गई है बल्कि आज से सालों पहले महान संत कबीरदास जी ने कही है। कबीरदास जी ने कहा है कि भगवान ने नारियों को मोहक बनाया है और पुरूषों का काम है कि उनके मोह में उलझे बिना अपने काम पर ध्यान दें।
जिसने भी स्त्रियों के रूप जाल और मोहिनी अदाओं पर अपने मन और नैन को भटकाया है उसका नाश तय है। तुलसीदास जी ने अपने एक दोहे में इसे स्पष्ट करते हुए कहा है 'नौनों काजर देह के, गाढै बांधे केस। हाथों मेंहदी लाय के, बाधिनी खाय देस।।
यानी स्त्री आंखों में काजल लगाकर, बालों को अच्छी तरह संवारकर और हाथों में मेंहदी लगाकर अपने रूप आकर्षण से पूरी दुनिया को बांध लेती है। इस पर भी परस्त्री से संबंध तो और भी खतरनाक है। इसका वर्णन कबीरदास जी ने अपने अगले दोहे में किया है।
परनारी पर कुदृष्टि का अंजाम
कबीरदास जी कहते हैं कि 'परनारी पैनी छुरी, मति कोई करो प्रसंग। रावन के दस शीश गये, परनारी के संग।। इस बात को तो हर कोई जानता है कि रावण ने परस्त्री यानी भगवान राम की पत्नी सीता का हरण किया था।
इसका परिणाम यह हुआ कि रावण जो दस सिर वाला था वह अपने वंश समेट नष्ट हो गया। कबीरदास जी ने अपने इस दोहे में इसी बात को स्पष्ट किया है कि जो भी परनारी पर कुदृष्टि रखता है उसका अंत तय है।
इतिहास और पुराणों में इस तरह की कई कथाएं मौजूद हैं देवी अहिल्या पर कुदृष्टि रखने के कारण देवराज इंद्र को भी अपना सिंहासन गंवाना पड़ा था। वर्तमान समय में भी कई ऐसी घटनाएं आपने सुनी होगी कि परस्त्री संबंध के कारण परिवार तबाह हो गया।
परस्त्री को छेड़ने वालों के लिए क्या कहा है कबीदास जी ने
कबीरदास जी अपने एक दोहे में कहते हैं कि परायी स्त्री पैनी छुड़ी के समान होती है। यह छुड़ी इतनी तेज होती है कि इससे बचना बड़ा ही कठिन है क्योंकि यह कभी हंसकर तो कभी रोकर व्यक्ति को अपने जाल में फंसा लेती है और उनका जीवन नष्ट कर देती है।
इसलिए ऐसी स्त्रियों से सदैव दूर ही रहना चाहिए इन पर न तो अपनी निगाहें जमानी चाहिए और न ही इनसे अधिक हंसी मजार और छेड़छाड़ करना चाहिए क्योंकि अंत में इसका परिणाम आपको ही भुगतना होगा।
अपनी इस बात को कबीरदास जी ने अपने इस दोहे में स्पष्ट किया है 'परनारी पैरी छुरी, बिरला बाचै कोय। कबहूं छेड़ि न देखिए, हंसि हंसि खावे रोय।
इस तरह स्त्रियों से प्रेम करने में नुकसान नहीं
कबीरदास जी ने अपने दोहों के माध्यम से स्त्रियों के सम्मान एवं उनका आदर करने की बात कही है। वह कहते हैं कि परस्त्री से नाता तभी आपके लिए संकट का कारण हो सकता है जब आप उनके प्रति मन में वासना या बुरे विचार रखते हैं।
स्त्रियों के प्रति मन में वासना का भाव रखकर अगर आप उनसे नजदीकी बढ़ाते हैं तब वह आपके लिए हर हाल में नुकसानदायक हो सकता है। तुलसीदास जी कहते हैं कि 'नारी सेती नेह, बुधि विवेक सबही हरै। वृथा गॅंवावै देह, कारज कोई न सारै।।
यानी स्त्री के प्रति वासनात्मक बुद्घि रखने पर वह आपके बल, बुद्घि और विवेक यानी अच्छे बुरे का विचार करने का ज्ञान खत्म कर देती है। ऐसा व्यक्ति कोई भी कल्याणकारी काम नहीं कर पाता है। इसलिए स्त्रियों के प्रति मन में आदर, श्रद्घा और सम्मान का भाव रखना चाहिए।