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Puja Vidhi: पूजा के बाद ये आवश्यक कार्य करना न भूलें
Wed, 05 Feb 2020 11:07 AM IST
योगेश जोशी
धर्म डेस्क,अमर उजाला
धर्म डेस्क,अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Wed, 05 Feb 2020 11:07 AM IST
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prayer
- फोटो : prayer
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भगवान की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। नित्य नियम से पूजा करने से हमें आंतरिक शक्ति मिलती है और हमारा मन शांत रहता है। धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों में जिन बातों का वर्णन है, उन नियमों से हम पूजा-पाठ करने की कोशिश तो करते हैं, परंतु कहीं बार कोई न कोई गलती हो ही जाती है, इसलिए हिंदू धर्म में पूजा के बाद क्षमा मांगने का नियम है।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन।
यत्पूजितं मया देव! परिपूर्ण तदस्तु मे॥
इस मंत्र का यह मतलब है कि- भगवान मैं आपको बुलाना भी नही जानता और विदा करना भी नही। मुझे पूजा-पाठ करना भी नही आता है। मुझसे जो भी गलतियां हुई हैं उनके लिए मुझे क्षमा करें। मुझे न पूजा करने की प्रक्रिया पता है और न ही मुझे मंत्र याद हैं। मेरी पूजा स्वीकार करें।
क्षमा मांगने से हमारे अंदर अंहकार की भावना नही आती है।
अगर आप मंत्र जाप नही कर सकते हैं तो आप बिना मंत्र जाप के भी क्षमा याचना कर सकते हैं।
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- हिंदू धर्म में क्षमा याचना के लिए यह मंत्र बोला जाता है.....
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन।
यत्पूजितं मया देव! परिपूर्ण तदस्तु मे॥
इस मंत्र का यह मतलब है कि- भगवान मैं आपको बुलाना भी नही जानता और विदा करना भी नही। मुझे पूजा-पाठ करना भी नही आता है। मुझसे जो भी गलतियां हुई हैं उनके लिए मुझे क्षमा करें। मुझे न पूजा करने की प्रक्रिया पता है और न ही मुझे मंत्र याद हैं। मेरी पूजा स्वीकार करें।
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क्षमा मांगने से हमारे अंदर अंहकार की भावना नही आती है।
अगर आप मंत्र जाप नही कर सकते हैं तो आप बिना मंत्र जाप के भी क्षमा याचना कर सकते हैं।
- इस परंपरा का संदेश भगवान से क्षमा मांगने की यह परंपरा हमें यह संदेश देती है कि व्यक्ति को अपनी गलतियों के लिए तुरंत क्षमा मांग लेनी चाहिए।
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